टीम एबीएन, रांची। राष्ट्रीय सनातन एकता मंच एवं विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि इस वर्ष अक्षय तृतीया का पर्व 10 मई को मनाया जा रहा है। यह दिन नये उद्योग और व्यवसाय के लिए बहुत ही शुभकारी है, अक्षय तृतीया में किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य किये जा सकते हैं। इस दिन किसी पवित्र नदी में स्नान और दान का महत्व है।
अक्षय तृतीया हिंदुओं के लिए महान धार्मिक महत्व का दिन है जो नई शुरुआत और सोने-चांदी, नये घर जमीन, वाहन, चांदी के सिक्के और मिट्टी के बर्तन जैसी शुभ वस्तुओं की खरीद का प्रतीक है। इसकी खरीदारी से परिवार में सुख-समृद्धि और सौभाग्य आता है। अक्षय तृतीया को देश में कुछ राज्यों और क्षेत्र में अबूझ मुहूर्त और आखा तीज के नाम से भी जाना जाता है।
इस दिन भगवान विष्णु, गणेश और देवी लक्ष्मी की पूजा पूरे विधि विधान के साथ की जाती है। इस दिन स्वर्ण सामग्री खरीदना भी शुभ माना जाता है, अक्षय तृतीया भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम के जन्मदिन के रूप में भी मनाया जाता है यह त्योहार देश के अलग-अलग जगहों पर परशुराम जयंती के रूप मे भी मनाया जाता है।
ऐसा भी कहा जाता है कि इस दिन गंगा नदी धरती पर अवतरित हुई थी राजा भगीरथ ने गंगा को धरती पर अवतरित करने के लिए कई वर्षों तक तप किया था। इस दिन पवित्र गंगा में स्नान करना, तथा देवी अन्नपूर्णा की पूजा करना भी बहुत शुभ माना जाता है।
इस दिन गरीबों को खाना खिलाने से घर में अन्न की कभी कमी नहीं होती है। कहा जाता है कि इस दिन से महर्षि वेदव्यास जी ने महाभारत को लिखना शुरू किया था। अक्षय तृतीया 10 मई को सुबह 5:31 से प्रारंभ हो रहा है जो कि अगले दिन सुबह 4:37 तक रहेगा।
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