एबीएन एडिटोरियल डेस्क। कांग्रेस कभी भी इतने लंबे समय के लिए इतनी कमजोर हताश मायूस होकर विपक्ष में नहीं रही है। पांच सात साल के लिए कभी विपक्ष में रही भी है तो ठसक के साथ रही है। क्योंकि तब सत्ता में गठबंधन सरकारें रहीं हैं, जो खुद हिलती-डुलती आपसी टकराव में रहती थीं और कांग्रेस मजे लेती थी।
1989 में वीपी सिंह के हाथों हार के बाद राजीव गांधी ने कहा भी था कि ये एकाध हार हमारे लिए थोड़ा आराम का वक्त होता है, फिर तो सत्ता हमीं को मिलनी है। लेकिन 2014 के बाद कांग्रेस को वाकई में हारे दीन हीन विपक्षी होने का अहसास हुआ है।
उन मसलों पर निर्णायक काम होना जिसे कांग्रेस ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था- जैसे राम मंदिर, विदेशों में भी आतंकियों शत्रुओं को ठिकाने लगाना, पाकिस्तान पर स्ट्रैटेजिक हमले, पाकिस्तान को अलग थलग कमजोर बनाने में सफलता, तीन तलाक, 370, सीएए, एनआरसी जैसे बर्र के छत्ते में हाथ डालना, देश में आतंकवादी घटनाओं पर अंकुश, अब केंद्र का यूसीसी पर भी आगे बढ़ना। यूपी जैसे अराजक माफिया प्रभावी राज्य में लगातार दो बार भगवा सरकार और मुस्लिम माफियाओं का सफाया। ये सब बातें कांग्रेसी और सेकुलर सरकारों की फितरत के खिलाफ जाती हैं।
यह फेहरिश्त लंबी है। अब मैं कोई भविष्यद्रष्टा नहीं हूं पर अतीतद्रष्टा तो हम सभी हैं और उसके आधार पर ही यह सब लिखा गया है। यह सब कम तीव्रता में पहले घटित हो चुका है। जैसे...
2004 में बाजपेयी सरकार को धूल चटा कर कांग्रेस ने आते ही यही सब किया, 2009 में यूपीए टू ने तो भ्रष्टाचार के सारे रिकार्ड ही तोड़ दिये और हमारा प्रधानमंत्री बोला कि देश? के संसाधनों पर पहला अधिकार अल्पसंख्यकों और मुसलमानों का है। उसके पहले मुंबई दिल्ली कश्मीर हर कुछ दिनों पर आतंकी हमलों से दहलता था।
याद कीजिये जैसे ही महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे सीएम बने हर छोटी से छोटी आवाज को भी सड़क छाप स्टाइल में उद्धव एंड कंपनी ने निबटाया। संजय राऊत, महाराष्ट्र पुलिस और शिव सैनिकों ने उद्धव के सीएम रहते भरपूर तांडव किया। यूपीए के आने पर यह महाराष्ट्र स्टाइल पूरे देश में होगा।
और एक सबसे महत्वपूर्ण काम होगा कि अंबानी अडाणी को काले पानी की सजा देकर अंडमान निकोबार जेल में डाल दिया जायेगा, माल्या को रस्सी से बांध कर इंग्लैंड से मुंबई लाया जायेगा। इस देश से बेरोजगारी और महंगाई एक झटके में गायब हो जायेगी। दो रुपए में दिल्ली से अपने गांव बिहार झारखंड ट्रेन से लौट सकेंगे, उन युवाओं को फिर से ब्यूरोक्रेसी वाली नौकरी सौंप दी जायेगी जो 2014 में मोदी के आने से नौकरी गवां बैठे थे।
टके सेर खाजा टके सेर भाजी मिलने लगेगा। हर व्यक्ति को नौकरी या फिर एक लाख रुपये हर महीने मिलेंगे। आखिर कांग्रेसी पीएम मनमोहन सिंह ने कहा ही था कि पैसे पेड़ पर लगते हैं जब मन करे दो चार अरब तोड़ लो। (लेखक वरिष्ठ स्तंभकार और पत्रकारिता विभाग से जुड़े हैं।)
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse