एबीएन सेंट्रल डेस्क। महाराष्ट्र में मुख्य रूप से लाल प्याज की खेती होती है जबकि गुजरात में सफेद प्याज की पैदावार ज्यादा होती है।
लोकसभा चुनाव के बीच महाराष्ट्र में प्याज एक बार फिर से चुनावी मुद्दा बनता जा रहा है। निर्यात की अनुमति मिलने के बावजूद महाराष्ट्र की अधिकांश प्याज मंड़ियों में प्याज के दाम जमीन पर है।
किसानों को 5-6 रुपये किलों का भाव मिल रहा है जिससे प्याज किसान सरकार से नाराज है। किसानों की नाराजगी कम करने के लिए सरकार ने प्याज निर्यात में ढील जरुर दी लेकिन उसको भी राजनीतिक दल लाल-सफेद यानी महाराष्ट्र झ्र गुजरात का मुद्दा बना कर पेश कर रहे हैं। भाव काम होने और चुनाव के बाद कीमतों में सुधार होने की उम्मीद की वजह से मंड़ियों में प्याज की आवक बहुत कम हो गयी है।
महाराष्ट्र की अधिकांश प्याज मंडियों में प्याज के दाम किसानों को रुला रहे हैं। थोक मंड़ियों में करीब 5-7 रुपये किलो प्याज के दाम बोले जा रहे हैं, जिससे किसानों के हाथ में मुश्किल से प्रति किलोग्राम 2-3 रुपये मिल पा रहे हैं। दाम कम होने की वजह से मंड़ियों में प्याज की आवक भी बहुत कम हो गयी है।
एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंड़ी लासनगांव में इस समय औसत प्रति दिन 200 टन प्याज आ रही है जबकि एक महीने पहले आवक करीब 1300 टन थी और औसत कीमत 1700 रुपये प्रति क्विंटल के पार थी। महाराष्ट्र की लगभग सभी प्याज मंड़ियों का यही हाल है कीमतें कम होने के कारण किसान मंड़ियों में प्याज नहीं ला रहे हैं।
प्याज के दाम कम मिलने से किसानों के बीच सरकार को लेकर गुस्सा है। दाम कम मिलने की वजह किसान निर्यातबंदी को मान रहे हैं। इस बात को सरकार भी समझ रही है इसीलिए हाल ही में सरकार ने प्याज के निर्यात पर बड़ा फैसला लिया है।
हाल ही में सरकार ने निर्यात पर प्रतिबंध के बावजूद छह देशों को 99,150 टन प्याज भेजने की मंजूरी दी है। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने आधिकारिक बयान में कहा कि सरकार ने छह देशों बांग्लादेश, यूएई, भूटान, बहरीन, मॉरीशस और श्रीलंका को 99,150 टन प्याज के निर्यात की मंजूरी दी है।
केंद्र ने पश्चिम एशिया और कुछ यूरोपीय देशों के निर्यात बाजारों के लिए विशेष रूप से उगाये गये 2,000 टन सफेद प्याज के निर्यात की भी मंजूरी दी है। सरकार ने 8 दिसंबर, 2023 को प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था।
25 अप्रैल केंद्र सरकार की तरफ से गुजरात से 2,000 टन सफेद प्याज के निर्यात को मंजूरी देने के फैसले को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। महाराष्ट्र के प्याज किसानों को लग रहा है कि उन्हें नजरअंदाज किया गया है।
दरअसल, महाराष्ट्र में मुख्य रूप से लाल प्याज की खेती होती है जबकि गुजरात में सफेद प्याज की पैदावार ज्यादा होती है। महाराष्ट्र के किसान सवाल उठाते हुए कहते हैं कि सफेद और लाल प्याज के लिए अलग-अलग नियम क्यों हैं।
प्याज उत्पादक संघ के राज्य अध्यक्ष भरत दिघोले कहते हैं कि अधिसूचना का कोई मतलब नहीं है, यह कदम पूरी तरह से वोट हासिल करने के लिए है और संभावित मतदाताओं को खुश करने का एक झूठा प्रयास है।
महाराष्ट्र कांदा उत्पादक संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार राज्य में प्याज की उत्पादन लागत 18 रुपये किलो तक पहुंच गयी है। जबकि किसान के हाथ में एक या दो रुपये मिल रहे हैं ऐसे में किसानों को प्याज की खेती से धीरे धीरे मोहभंग हो रहा है।
देश में इस साल करीब 5 से 10 मिलियन टन प्याज का उत्पादन होने की उम्मीद है। किसानों को उनके उपज का सही दाम मिले तो इसके लिए केंद्र सरकार कम से कम 15 लाख टन प्याज के निर्यात को मंजूरी दे जिससे किसानों को अच्छी आमदनी हो सके।
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