पुत्र स्वर्ग और नरक दोनों दे सकता है : आचार्य दीनानाथ शरण

 

अतिथि अग्नि स्वरूप है

टीम एबीएन, रांची। श्री जगतगुरू देवाचार्य मलुक पीठाधीश्वर श्री राजेंद्र दास जी महाराज के कृपापात्र शिष्य परम पूज्य आचार्य दीनानाथ शरण जी महाराज श्री धाम वृंदावन के मुखारविंद से आज पंचम् दिवस की भागवत कथा में कहा कि कृष्ण जन्म के बाद नंदबाबा ने केवल ब्राह्मण को ही नहीं भट, सुत और जेल के बंद कैदियों को भी दान दिया। 

संतान के जन्म पर गोदान और नान्दीमुख श्राद्ध जरूर करना चाहिए। तभी पुत्र का जन्म सार्थक होता है। वरना पुत्र भी दु:ख का कारण होता है और दुर्गति भी पुत्र से होता है। धुंधकारी, वेन, कंस इसके उदाहरण हैं। जन्म के समय दान-पुण्य से बालक को भविष्य में जीवन की सुरक्षा और समृद्धि देती है। ये सीख हम कृष्ण और राम के जीवन पा सकते हैं। 

अतिथि अग्नि स्वरूप है। इसलिए जल के साथ गुड़, मिठाई जरूर देना चाहिए। आज पुतना यशोदा की अतिथि बन कर आयी। इसलिए यशोदा सबाल घातिनी पुतला की खूब सेवा की। बाल लीला की कथा, मटकी फोड़ झांकी भी प्रस्तुत की गया। यह जानकारी पंडित रामदेव पाण्डेय ने दी।

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