टीम एबीएन, कोडरमा। कहा जाता है कि भगवान एक साथ सभी दरवाजे बंद नहीं करते। एक दरवाजा बंद करते हैं तो दूसरा खोल देते हैं। यह कहावत कोडरमा की नेत्रहीन शालू आरोड़ा पर पूरी तरह से लागू होता है।
कोडरमा निवासी करतार सिंह आरोड़ा और निर्मल आरोड़ा की नेत्रहीन पुत्री शालू आरोड़ा का चयन बिहार में प्लस टू हाई स्कूल में म्यूजिक टीचर के रुप में हुआ है। इसके पहले भी शालू का चयन झारखंड के प्लस टू हाई स्कूल में म्यमजिक टीचर के रुप में हुआ था लेकिन कॉसिलिंग में पेपर में कुछ कमी होने से वो छंट गयी थी। कितु उसने हार नहीं मानी और बिहार में चयनित होकर दिव्यांगों के लिए मिसाल बन गयी।
बता दें कि शालू स्थानीय जेजे कॉलेज से ग्रेजुएशन पॉलिटिकल साइंस से किया। उन्होंने चंडीगढ़ और इलाहाबाद से बीएड की परीक्षा पास की तथा यहीं से एमए का कोर्स भी किया। पूर्व में शालू आरोड़ा झु़मरी तिलैया के निजी स्कूलों में बच्चों को म्यूजिक सिखाती थी। इनसे प्रशिक्षित बच्चों ने जिला स्तर पर आयोजित प्रतियोगिताओं में सफलता का परचम लहराया है।
शालू कहती हैं कि उन्हें नेत्रहीनता का कभी आभाष नहीं हुआ। वो मन की आंखों से दु निया को देखती है। वहीं उनके माता-पिता कहते हैं कि उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है। ट्रेनिंग के बाद शालू फिलवक्त बिहार के राजकीयकृत प्लस टू उच्च-माध्यमिक विद्यालय, मरांची पटना में म्यूजिट टीचर के रुप में योगदान दे रही हैं।
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