सुख क्षणिक है, आनन्द चीर है : पंडित दीनानाथ

 

  • कथा ऐसी हो जिसे ज्ञान, वैराग्य और भक्ति बढ़े

टीम एबीएन, रांची। भगवान पालन पोषण करते है पर संहार भी करते है , तब दयावान नहीं होते है , भगवान सबका एक जैसा पालन करते है, संहार इसलिए करते हैं। कि सत भगवान है और संसार बदलता रहता है, जो तीनों काल में है। वही सत है, इसी सत (सत्य), चित और आनन्द है। 

यह आनन्द परमानन्द भगवान ही देते हैं। सुख तो भोजन से भी मिलता है। भगवान विश्व का उत्पति पालन और संहार का कारक है। भगवान के शरण मे आने से तीनो ताप दैहिक, दैविक और भौतिक ताप नष्ट हो जाता है। भगवान के शरणागत होने का यही लाभ है कथा ऐसी हो जिसे भक्ति ज्ञान और वैराग्य बढ़े।

वृन्दावन से आये आचार्य दीनानाथ जी ने आज की कथा में यह कहा। भागवत की यह कथा श्रीराम जानकी मन्दिर हाउसिंग कालोनी बरियातु मैदान में आगामी 6 अप्रैल तक सन्ध्या सात से दस बजे तक संगीत रसमयी कथा से चलेगी। यह जानकारी पंडित रामदेव पाण्डेय ने दी।

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