एबीएन न्यूजन नेटवर्क, मधुबनी। बिहार के मधुबनी जिले में एक चौंकाने वाली घटना में स्थानीय बाजार में लड़कियों के साथ साथ घूमते पाए जाने पर असामाजिक तत्वों ने मारपीट कर तीन लड़कों का जबरन विवाह करवा दिया। घटना एक फरवरी की रात की है और अगले दिन कहीं जाकर इस मामले की जानकारी मिलने पर पुलिस को सूचित किया गया। लड़कों के परिजनों को इस विवाह के बारे में सूचित भी नहीं किया गया। आधार कार्ड में दर्ज उम्र के हिसाब से तीनों लड़कों की उम्र विवाह के लिए कानूनी तौर पर मान्य 21 वर्ष से काफी कम है।
इस घटना की जानकारी मिलते ही बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के सहयोगी संगठन ग्राम विकास युवा ट्रस्ट ने स्थानीय थाने से संपर्क किया। लेकिन थाने से त्वरित कार्रवाई नहीं होते देख ट्रस्ट के कार्यकर्ताओं ने स्थानीय एसडीएम व बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी (सीएमपीओ) को लिखित अर्जी दी। सीएमपीओ ने इसके जवाब में स्थानीय थाना प्रभारी एवं प्रखंड विकास अधिकारी (बीडीओ) को इस बारे में उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इसके बावजूद ग्रामीणों के विरोध की आशंका के कारण पुलिस बोर्ड परीक्षाओं की आड़ लेकर कार्रवाई में आनाकानी करती रही।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अंत में ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने जिले की चाइल्ड हेल्प लाइन (जिला बाल संरक्षण इकाई) और जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण (डालसा) से संपर्क किया। इन दोनों के हस्तक्षेप के बाद पुलिस लड़कियों के गांव पहुंची और इस संबंध में छह मामले दर्ज करने के बाद तीनों लड़कियों एवं लड़कों को बाल संरक्षण इकाई के सुपुर्द कर दिया। चाइल्ड हेल्प लाइन ने काउंसलिंग के बाद शुक्रवार शाम तीनों लड़कियों को अस्थायी बालिका गृह एवं लड़कों को बाल गृह भेज दिया।
इस मामले में फिलहाल आगे की कार्रवाई जारी है। पुलिस ने विवाह कराने वाले पंडित और मारपीट कर जबरन विवाह कराने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों व पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार इन सभी लड़के-लड़कियों की आपस में काफी समय से जान-पहचान थी और ये स्थानीय बाजार में अक्सर साथ देखे जाते थे। लड़कियों के गांव के कुछ असामाजिक तत्वों को यह नागवार गुजरा और उन्होंने इन लड़कों को पकड़ कर पहले मारा-पीटा और बाद में उनका विवाह करा दिया।
बाल विवाह मुक्त भारत (सीएमएफआई) देश को 2030 तक बाल विवाह से मुक्त कराने के लक्ष्य के साथ एक मंच पर आए 160 से ज्यादा गैरसरकारी संगठनों का एक गठबंधन है। ये संगठन देश में बाल विवाह की उच्च दर वाले 300 से ज्यादा जिलों में पूरी तरह महिलाओं की अगुआई में जमीनी स्तर पर अभियान चला रहे हैं।
बाल विवाह मुक्त भारत के संयोजक रवि कांत ने इस घटना को प्रशासन व स्थानीय ग्रामीणों की विफलता करार देते हुए कहा कि समूचा प्रकरण कई मायनों में शर्मनाक है। बिहार एक ऐसा राज्य है, जहां बाल विवाह की दर 40 प्रतिशत है और राज्य सरकार इसकी रोकथाम के तमाम उपाय कर रही है। इसी उद्देश्य से यह कानून लाया गया था जिसमें बाल विवाह के लिए पंचायत पदाधिकारियों की जवाबदेही तय की गई थी। पंचायत पदाधिकारियों को बाल विवाह के बारे में सूचित करने और इसकी रोकथाम का जिम्मा सौंपा गया था।
इसके बावजूद स्थानीय मुखिया या सरपंच ने पुलिस या प्रशासन को सूचित करने की जहमत नहीं उठाई जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा- सूचना होने के बावजूद पंचायत प्रतिनिधियों ने किसी को जानकारी नहीं दी और प्रशासनिक निदेर्शों के बावजूद पुलिस ने कार्रवाई में सुस्ती दिखाई जो यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि चूक हर स्तर पर हुई है और बाल विवाह को रोकने के लिए अपेक्षित गंभीरता का अभी भी अभाव है। इससे संंबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से भी संपर्क किया जा सकता है।
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