टीम एबीएन, लोहरदगा। भारत के जन-जन के स्वांस -स्वांस में श्रीराम बसे हैं। इसलिए वह भारत के आत्मा है। उक्त बातें गुरुकुल शांति आश्रम लोहरदगा के आचार्य- सह- आर्य वीरदल के प्रदेश प्रमुख और राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा प्राण प्रतिष्ठा में आमंत्रित आचार्य शरच्चंद्र आर्य ने कही। वह लोहरदगा जिले के पेशरार प्रखंड अंतर्गत वन-पहाडियों से अच्छादित ओनेगड़ा गांव के मडई (देवी मंडप) परिसर में आयोजित मंडप परिसर सफाई अभियान और महर्षि दयानंद सरस्वती के दो सौवीं जयंती समारोह और 22 जनवरी को अयोध्या में रामलला के होने वाले प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान के पावन अवसर पर आयोजित विशेष जनजातीय कल्याण हवन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। आचार्य ने कहा कि कुछ लोग सनातन समाज को बांटने के लिए श्रीराम के सबसे प्रिय रहे जनजातीय समाज को भ्रम में डालने का काम करते हैं।
जनजातीय समाज के लोग अब शिक्षित, जागृत और संगठित हैं। अपने धार्मिक, सामाजिक और पारंपरिक हक और अधिकार को जान रहे हैं। सनातन धर्मावलंबी प्रकृति पूजक है। धरती माता, गौ माता, पेड़- पर्वत, नदी-नाले,जीव- जन्तु सभी चीजों की पूजा अर्चना की जाती है। सरना समाज के लोग भी प्रकृति पूजक हैं वह भी सनातन के पंथ हैं।
विशिष्ट अतिथि लाल नवल किशोर नाथ शाहदेव ने कहा कि वैसे तो श्रीराम के काल में कोई ऊंचा या नीचा नहीं होता था। भगवान किसी जातिवर्ग के नहीं होते और न ही वह मनुष्य जाति में भेद करते हैं। रामायण काल में जातिगत जो भिन्नता थी। वह मनुष्यों के रंग, रूप और आकार को लेकर थी। जैसे वानर, ऋक्ष, रक्ष और किरात जातियां मनुष्य से भिन्न थी। केवट, शबरी, जटायु, सुग्रीव और संपाति आदि से राम के संबंध दर्शाते हैं कि उस काल में ऐसी कोई जातिगत भावना नहीं थी, जो वर्तमान में हमें देखने को मिलती है। हनुमानजी के गुरु मतंग ऋषि आज की जातिगत व्यवस्था अनुसार तो वह ही कहलायेंगे?
विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बिहार-झारखंड क्षेत्र सेवा प्रमुख अजय कुमार ने कहा कि भगवान श्रीराम ने 14 वर्ष वन में रहकर भारत भर में भ्रमण कर भारतीय आदिवासी, जनजाति, पहाड़ी और समुद्री लोगों के बीच सत्य, प्रेम, मर्यादा और सेवा का संदेश फैलाया। यही कारण रहा की श्रीराम का जब रावण से युद्ध हुआ तो सभी तरह की वनवासी और आदिवासी जातियों ने श्रीराम का साथ दिया। इसके पूर्व महादेव उरांव आर्य की अगुवाई में जनजातीय कल्याण यज्ञानुष्ठान किया गया। इसमें गांव के सभी आदिवासी स्त्री-पुरुष और बच्चे शामिल हुए सभी लोगों ने संविदा समर्पित किया।
इस मौके पर गांव के पहान बरतिया नगेसिया ने कहा कि यज्ञ गांव और ग्रामीणों के कल्याण के लिए किया जाता है। ग्राम देवता को संतुष्ट किया जाता है। शांति, प्रेम और विकास के साथ व्यक्ति और गांव के नकारात्मक ऊर्जा को बाहर कर सकारात्मक ऊर्जा को भरने का काम करता है।
इसके पहले गांव के मडई (देवी मंदिर) का ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर सामूहिक रूप से साफ सफाई किया। 22 जनवरी के शाम को सभी ग्रामवासियों ने मंडप में दीप प्रज्वलित करने के बाद अपने-अपने घरों में दीप जलाने की बात कही। गांव का अद्भुत माहौल था।
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