एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रवर्तन निदेशालय ने झारखंड सरकार पर पत्र लिखकर गंभीर आरोप लगाये हैं। ईडी पत्र के जरिए कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग में जांच करने का राज्य सरकार को कोई अधिकार नहीं है। साथ ही कहा कि केंद्र की शक्तियों को अधिग्रहण करने की कोशिश की जा रही है।
गौरतलब है कि यह मामला तब सामने आया जब झारखंड की प्रधान सचिव वंदना दलेल को एक पत्र के जवाब में ईडी ने यह भेजा था। दलेल ने ईडी को पत्र लिखकर आईएएस अधिकारी और कुछ अन्य लोगों को तलब करने का कारण पूछा था। साथ ही पत्र के जरिए ईडी के जांच अधिकारी से मनी लॉन्ड्रिंग मामले के बारे में जानकारी मांगी थी।
झारखंड कैबिनेट ने पिछले सप्ताह एक निर्देश जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि राज्य में सरकारी कर्मचारी और केंद्रीय एजेंसियों से मिलने वाले नोटिस या समन के बारे में जवाब देने से पहले अपने विभाग के अधिकारी या राज्य कैबिनेट सचिवालय और सतर्कता विभाग को सूचित करना जरूरी कर दिया था।
ईडी आईओ ने प्रधान सचिव को पत्र लिखकर कहा कि राज्य कैबिनेट का पारित आदेश और उनके द्वारा एजेंसी को सूचित किया गया आदेश राज्य सरकार की कानूनी क्षमता से परे था।
पत्र में कड़े शब्दों में कहा कि ईडी एजेंसी के समन को न मानने के लिए उकसाने या साजिश रचने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने से पीछे नहीं हटेगी।
ईडी आईओ ने दलेल को दिए पत्र के जवाब में कहा कि समन नामित व्यक्तियों को जारी किया गया था, आश्चर्य की बात है कि इस मुद्दे में हस्तक्षेप वह क्यों कर रही हैं।
वहीं ईडी ने बुधवार को आरोप लगाया कि गिरफ्तार झारखंड कोयला व्यापारी इजहार अंसारी सब्सिडी वाला कोयला पाने के बदले कुछ अधिकारियों को रिश्वत देता था।
मामले पर कार्रवाई करते हुए मंगलवार को ईडी ने अंसारी को गिरफ्तार किया था। हजारीबाग में तीन स्थानों पर छापेमारी की थी। विशेष अदालत ने बुधवार को छह दिनों के लिए आरोपी को ईडी की हिरासत में भेज दिया है।
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