टीम एबीएन, रांची। ईडी ने झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन को एक बार फिर पत्र लिखा है। एजेंसी ने उनसे पूछा है कि वे बयान दर्ज कराने के लिए क्यों उपस्थित नहीं हो रहे हैं? इससे जांच में बाधा उत्पन्न हो रही है। ईडी ने उन्हें जवाब देने के लिए 16 से 20 जनवरी तक का वक्त दिया है।
उन्हें एजेंसी के समक्ष उपस्थित होने को भी कहा गया है। इसके पहले ईडी की ओर से उन्हें सात समन भेजे जा चुके हैं। इस पत्र को आठवां समन बताया जा रहा है। रांची के बड़गाईं अंचल में हुए जमीन घोटाले के मामले में ईडी हेमंत सोरेन का बयान दर्ज करना चाहती है। इसके लिए उन्हें बीते 29 दिसंबर को सातवां समन भेजा गया था, जिसे एजेंसी ने आखिरी समन बताते हुए सात दिनों के अंदर बयान दर्ज कराने को कहा था।
सातवें समन में सोरेन से कहा गया था कि वे दो दिनों के अंदर ऐसी जगह तय करके सूचित करें, जहां उनका बयान दर्ज किया जा सके। यह जगह दोनों पक्षों के लिए उपयुक्त होनी चाहिए। हालांकि, सोरेन इस समन पर भी उपस्थित नहीं हुए। उन्होंने इस पर 2 जनवरी को ईडी को पत्र लिखकर बार-बार भेजे जा रहे समन की तार्किकता और वैधता पर सवाल उठाया था।
सीएम ने लिखा था कि समन भेजने की खबर उनसे पहले मीडिया तक पहुंचायी जाती है, जिसकी वजह से उन्हें मीडिया ट्रायल का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सभी मामलों में अपना पक्ष स्पष्ट रूप से पहले ही रख दिया है। इसके बावजूद उन्हें भेजा जा रहा समन राजनीति से प्रेरित लगता है और ऐसा करके उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश की जा रही है।
ईडी के आठवें समन को लेकर गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा- आप के पाप के लिए चौथा और झारखंड के मुख्यमंत्री के डकैती के लिए 8वां समन कोई मायने नहीं रखता। केजरीवाल जी तो हल्ला मचा रहे हैं, हमारा मुख्यमंत्री तो चुपचाप रजाई में घुसकर जाड़ा काट रहे हैं। कम से कम शिबू सोरेन जी की इज्जत तो रखिए, इस्तीफा दीजिये व एजेंसियों के प्रश्न का जवाब दीजिये।
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