श्री रामजन्मभूमि आंदोलन और महाराज अग्रसेन के परमपावन रघुवंशी अग्रकुल का योगदान : संजय सर्राफ

 

टीम एबीएन, रांची। ग्रवाल सभा एवं रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने कहा है। श्री राम जन्मभूमि आंदोलन व मंदिर निर्माण में अग्रवाल समाज का भी अग्रणी भूमिका रही है। विदित हो सन् 1528 में मुग़ल बादशाह बाबर ने रघुकुलवंश मणि श्री राम की जन्मभूमि पर बना विशाल मंदिर तोड़ कर वहां बाबरी मस्जिद का निर्माण किया। 

ये एक कलंक था करोड़ों हिंदुओं विशेषकर श्री राम के वंशज रघुवंशिओं के मस्तक पर। उसके बाद सैकड़ों वर्षों तक रघुवंशियों और मुग़लों में खूनी संघर्ष हुए लेकिन हम उस कलंक को धोने में सफल नहीं हुए। संघर्षों से जूझते हुए आंदोलन की बागडोर फिर संभाली अग्रवालों ने, अग्रवाल समाज महाराजा अग्रसेन के वंशज हैं जिनका जन्म राजा राम के पुत्र कुश की चौतीसवीं पीढ़ी में हुआ था। 

1949 में जब श्रीरामलला सरकार का प्राकट्य हुआ था उसमें श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार जी महती भूमिका थी। श्रीराम लला सरकार की वर्तमान मूर्ति को श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार जी ने संत समाज के सहयोग से जन्मभूमि मंदिर में स्थापित किया था। उस मूर्ति को स्वयं पोद्दार जी ने अष्टधातु से निर्मित करवाया था। 

श्रीराम लला का प्राकट्य होने से विवादित ढांचे पर दोबारा श्री राम का पूजन अर्चन सम्पूर्ण विधिविधान से होना शुरू हो गया था। इसके बाद सन् 80 के दशक के अंत मे श्री अशोक सिंघल जी ने दोबारा पूरे भारत वर्ष में भव्य राममंदिर आंदोलन का शंखनाद किया। पूरे भारत वर्ष से उन्होंने रामभक्त निकाल दिये। 

सन् 1989 में उन्होंने अपने सर पर ईंट रखकर रामजन्मभूमि मंदिर का शिलान्यास किया। माननीय श्री अशोक सिंघल जी के नेतृत्व में ही रामभक्तों ने 6 दिसंबर 1992 को 5 शताब्दियों से हिंदुओं के माथे पर लगा धो दिया। उसके बाद से श्री अशोक सिंघल जी और उनकी पूरी रामजन्मभूमि के लोय सतत संघर्षशील रही।

बाबरी मस्जिद विध्वंश पर जब बड़े बड़े नेता इस कार्य को स्वीकारने से पीछे हट गए तब शिव सेना के बड़े नेता जय भगवान गोयल ने डंके की चोट पर कहा कि हां हमने बाबरी मस्जिद का विध्वंश किया है। अशोक सिंघल जी ने रामजन्मभूमि निर्माण के लिए अग्रकुल की परंपरा एक रुपये और एक ईंट का सहारा लिया। हर हिन्दू के घर से एक रामनामी ईंट और एक रुपये का दान आया। जिससे आंदोलन को बहुत मजबूती प्राप्त हुई। 

श्री देवकी नंदन अग्रवाल जी ने श्रीरामलला के वर्तमान विग्रह को ही जन्मभूमि का पैरोकार बनाने का मुकदमा कोर्ट में पेश किया और मुकदमे को जीतकर रामलला विराजमान को मुख्य पैरोकार बनाया और उनके प्रथम मित्र बने। 

सीताराम गोयल, हनुमान प्रसाद पोद्दार, रामस्वरूप अग्रवाल, डॉ धर्मपाल अग्रवाल आदि ने विवादित ढांचे से पूर्व वहां रामजन्मभूमि मंदिर था इसको सिद्ध करने के लिए अनेकों साक्ष्य प्रस्तुत किये जो कोर्ट केस में बहुत काम आये। अशोक सिंघल जी के राइट हैंड श्री चम्पत राय बंसल जी ने भी ये सभी साक्ष्य कोर्ट में रखे जिससे हिन्दू समाज को इस केस को जीतने में बहुत मजबूती मिली। 

उन्हें ही सबने रामलला के पटवारी के नाम से विभूषित किया। अग्रवाल समाज के उद्योगपति विष्णु हरि डालमिया जी ने और हनुमान प्रसाद पोद्दार जी आजीवन जन्मभूमि आंदोलन के भामाशाह बने रहे और आंदोलन को आर्थिक मजबूती प्रदान की। वर्तमान में जिस जन्मभूमि मंदिर का निर्माण हो रहा है। 

उसका मॉडल स्वयं अशोक सिंघल जी द्वारा निर्मित है, जो श्री राम जी का विग्रह है उसका निर्माण श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार जी द्वारा करवाया गया था, इस मंदिर में जो रामनामी ईंट लगेंगी वो महाराज अग्रसेन के सिद्धान्त की प्रतीक हैं, उस मंदिर के शिलान्यास में मुख्य जजमान अशोक सिंघल जी के भतीजे पवन सिंघल थे। जिन्होंने संकल्प आदि मंत्र पढ़े, वर्तमान में मंदिर का पूरा निर्माण अग्रकुल रत्न श्री चम्पत राय, बंसल जी की देख रेख और नेतृत्व में हो रहा है।

अग्रवाल का अर्थ है अग्रणी - जो सम्पूर्ण समाज का नेतृत्व करे अगर हम कहें कि हिन्दू समाज के सबसे बड़े और सबसे लंबे समय तक चलने वाले आंदोलन में सर्व समाज का नेतृत्व अग्रवालों ने किया था तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

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