सरस्वती शिशु विद्या मंदिर धुर्वा में मना वार्षिक क्रीड़ा महोत्सव 2023 का उद्घाटन समारोह

 

टीम एबीएन, रांची। सोमवार को सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, धुर्वा, रांची के विद्यालय परिसर में तीन दिवसीय वार्षिक क्रीड़ा महोत्सव 2023 का भव्य उद्घाटन समारोह पूर्वक हुआ। इस वार्षिक कीड़ा महोत्सव 2023 में मुख्य अतिथि के रूप में न्यायमूर्ति डॉ एस एन पाठक, झारखंड उच्च न्यायालय, रांची एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में एच एन मिश्र, निदेशक कार्मिक, सीसीएल रांची उपस्थित थे। मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि एवं अन्य गणमान्य अतिथियों की आगवानी झारखंड की पारंपरिक विधि से हुआ। समारोह का प्रारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ।

मुख्य अतिथि माननीय न्यायमूर्ति डॉ एस एन पाठक, झारखंड उच्च न्यायालय, रांची के करकमलों द्वारा खेल ध्वज का ध्वजारोहण हुआ। तत्पश्चात माननीय न्यायमूर्ति महोदय ने वार्षिक क्रीड़ा महोत्सव- 2023 के विधिवत उद्घाटन की घोषणा की। खेल ज्योति प्रज्वलन के बाद सभी सदनों के ध्वजवाहक भैया-बहन ने खेल भावना को निष्ठापूर्वक निभाने की शपथ ली।

जैसा कि हमारे संस्कृति में हर शुभ कार्य का प्रारंभ गणेश जी की वंदना से होती है। ताकि सारे कार्य निर्विघ्न संपन्न हो, इसी परंपरा को आगे बढ़ते हुए प्राथमिक खंड की बहनों द्वारा गीत-नृत्य गणेश वंदना की मनमोहक प्रस्तुति हुई। माध्यमिक खंड के भैया द्वारा सूर्य नमस्कार के द्वारा जीवन में योग के महत्व को दशार्या गया। सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत बहनों ने शुभारंभ मंगल बेला आयी... बोल पर भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम की भूमिका रखते हुए विद्यालय प्रबंधकारिणी समिति, शिशु विकास मंदिर समिति (झारखंड) के मंत्री अखिलेश्वर नाथ मिश्र ने कहा कि विद्यालय में 2600 भैया-बहन संस्कारमय वातावरण में आधुनिक शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। 

विद्या भारती योजना के अंतर्गत 32000 विद्यालय देश भर में कार्य कर रहे हैं। लगभग साढ़े तीन लाख शिक्षक एवं 50 लाख विद्यार्थी पठन-पाठन कार्य में लगे हुए हैं। सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, धुर्वा में वृहत परिसर, हॉल एवं आधुनिक संसाधनों से युक्त भवन हैं। यहां वर्तमान में 130 भैया छात्रावास में अध्ययनरत हैं। 

रांची के सभी क्षेत्रों के भैया बहनों की आगमन की सुविधा हेतु बस की व्यवस्था है। उन्होंने आगे कहा कि खेल शिक्षा का एक अभिन्न अंग है। एक अच्छे खिलाड़ी बनने के लिए लगातार अभ्यास एवं प्रयास करना अतिआवश्यक है। माध्यमिक खंड की बहनों ने चरैवेती चरैवेती मंत्र पर गीत प्रस्तुत किया। जिसे सभी दर्शकों ने काफी सराहा।

माननीय न्यायमूर्ति डॉ एस एन पाठक, झारखंड उच्च न्यायालय, रांची ने प्रतिभागी भैया-बहनों को संबोधित करते हुए कहा कि गुरु की महिमा सर्वोपरि है। कर्मयोग में लगे लोग अच्छे और बुरे परिणाम से मुक्त हो जाते हैं। योग के लिए प्रयासरत रहें। अपने कार्य की अति उत्तम परिणाम के लिए प्रयास करें।
शिक्षा की यात्रा में खेलों का एक महत्वपूर्ण स्थान है। 

इसके अनेक आयाम है। खेल आपस के परस्पर सहयोग पर बल देता है। इसके द्वारा विद्यालय के भैया-बहन, आचार्य एवं अन्य कर्मचारियों को जोड़कर एक समन्वय युक्त माहौल के निर्माण में सहायक होता है। खेल समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है।

खेल बच्चों में ध्यान केंद्रीकरण एवं जीवन कौशल को सिखाता है जो शैक्षिक गतिविधियों में भी उपयोगी होता है। टीम भावना, अनुशासन एवं जिम्मेवारी भविष्य को संवारने में महत्वपूर्ण योगदान होता है। क्रीड़ा व्यक्तिगत लाभ जैसे मोटापे एवं शिथिलता को दूर करने का एक अच्छा साधन है। 

ऐसे आयोजन बच्चों में कक्षा के कार्यों के अतिरिक्त बच्चों में स्वाभिमान भरने का एक माध्यम है। आगे उन्होंने कहा कि आज खेल को पेशा के रूप में अपना रहे हैं। खेलों में सर्वोत्तम प्रदर्शन द्वारा आप किसी भी उच्च पेशों से अच्छी इज्जत और पैसा दोनों प्राप्त कर सकते हैं। 

उन्होंने अनेक खिलाड़ियों जैसे पी टी उषा, सुनील गावस्कर, कपिल देव, नीरज चोपड़ा, सविता पूनिया, मनप्रीत सिंह और विशेषकर रांची के महान खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी के खेल के क्षेत्र में उनकी उपलब्धियां के लिए याद किया। महाकाव्य गीता के अनुसार जीवन में कुछ भी भंगुर नहीं है। उन्होंने बच्चों से निवेदन किया कि विद्यालय को आप गुरु दक्षिणा के रूप में अच्छे इंसान बनकर पूर्ण करें। तभी आपकी शिक्षा पूर्ण होगी।

माननीय विशिष्ट अतिथि एच एन मिश्र, निदेशक कार्मिक, सीसीएल रांची ने अपने उद्बोधन में कहा कि आप भैया-बहन जैसी दुनिया चाहेंगे दुनिया वैसी ही बनेगी। आप जो ज्ञान यहां अर्जित कर रहे हैं वे सदा आपके साथ रहेगी आपकी प्रस्तुति में सदा विद्यालय की झलक समाज में दिखाई देगी। 

आप सभी को इस पर भी ध्यान देना की आवश्यकता है कि सूचना के इस युग में ज्ञान कैसे अर्जित करना है। सीखने की कोई उम्र नहीं होती है। प्रकृति जिज्ञासु होना चाहिए। क्रीड़ा हमें व्यावहारिक शिक्षा प्रदान करती है। खेलकूद से हमें न सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य प्राप्त होता है बल्कि एक दूसरे के सहयोग की भी शिक्षा मिलती है।

अध्यक्षीय आशीर्वचन शिशु विकास मंदिर समिति (झारखंड) के माननीय अध्यक्ष शक्तिनाथ लाल नाथ दास ने कहा कि क्रीड़ा विद्या भारती की एक प्रमुख योजना है जिसके तहत बच्चों में शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक क्षमता विकसित होती है। खेल प्रतिस्पद्धा का माध्यम हो वैमनस्य का नहीं। विद्यालय की प्राचार्य डॉ संध्या सिंह ने माननीय मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि एवं सभी आगंतुकों को धन्यवाद ज्ञापित किया। अतिथि परिचय का कार्यक्रम विद्यालय के उप प्राचार्य ललन कुमार ने संपन्न कराया।

मंच संचालन कक्षा एकादश की बहन समृद्धि सिंह एवं कक्षा अष्टम की बहन तुलसिका ने कराया। आज कुल 24 इवेंट हुए। जिसमें प्रमुख रूप से 400 मीटर, 200 मीटर की दौड़, जलेबी रेस की प्रतियोगिता संपन्न हुई। मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि ने विजेता भैया-बहनों को मेडल एवं प्रमाण-पत्र देकर पुरस्कृत किया।

इस समारोह में शिशु विकास मंदिर समिति के उपाध्यक्ष प्रो वी के जयसवाल, सह मंत्री डॉ धनेश्वर महतो, गुरुशरण प्रसाद, वरीय ट्रस्टी राष्ट्रीय सेवा भारती, अमरकांत झा, डॉ उमाशंकर शर्मा, लाल अशोक नाथ शाहदेव, आशीष नाथ शाहदेव, नर्मदेश्वर मिश्र आदि मौजूद थे। कल दिनांक 26.12.2023 द्वितीय दिवस के खेलकूद प्रतियोगिता में कुल 66 इवेंट होंगे। उक्त जानकारी विद्यालय की प्राचार्य डॉ संध्या सिंह ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

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