एबीएन डेस्क। 24 दिसंबर 1959 को मुंबई के चेंबूर इलाके की छोटी सी बस्ती में जन्में अनिल कपूर के पिता सुरेन्द्र कपूर फिल्म निर्माता थे। घर में फिल्मी माहौल में रहने के कारण वह अक्सर अपने पिता के साथ शूटिंग देखने चले जाते और अभिनेता बनने का सपना देखा करते।
अनिल कपूर के पिता ने फिल्मों के प्रति उनके बढ़ते रूझान को पहचान लिया और उन्हें इस रास्ते पर चलने के लिये प्रेरित किया। अनिल कपूर ने अपने सिने कैरियर की शुरूआत वर्ष 1979 में प्रदर्शित फिल्म हमारे तुम्हारे से की लेकिन कमजोर पटकथा और निर्देशन के कारण फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से नकार दी गयी।
वर्ष 1982 में उन्हें दिलीप कुमार और अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म शक्ति में काम करने का मौका मिला लेकिन इससे उन्हें कुछ खास फायदा नहीं पहुंचा।
वर्ष 1983 में अनिल कपूर को अपने पिता के बैनर तले बनी फिल्म वो सात दिन में काम करने का अवसर मिला।
इस फिल्म में उनके सामने कला फिल्मों के महारथी नसीरूदीन शाह थे लेकिन अनिल अपने दमदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीतने में सफल रहे। फिल्म की सफलता के बाद वह कुछ हद तक अपनी पहचान बनाने में सफल रहे। वर्ष 1985 मे अनिल कपूर को यश चोपड़ा की फिल्म मशाल में काम करने का अवसर मिला।
यूं तो पूरी फिल्म अभिनेता दिलीप कुमार के इर्द गिर्द घूमती थी लेकिन अनिल कपूर ने फिल्म में अपनी छोटी सी भूमिका में दर्शकों का दिल जीत लिया। इस फिल्म में दमदार अभिनय के लिये उन्हें सहायक अभिनेता का फिल्म फेयर अवार्ड भी मिला। वर्ष 1987 में प्रदर्शित फिल्म मिस्टर इंडिया अनिल कपूर के सिने कैरियर की सबसे कामयाब फिल्म साबित हुई।
शेखर कपूर के निर्देशन में बनी इस फिल्म में अनिल कपूर ने एक ऐसे युवक की भूमिका निभायी जिसे एक चमत्कारी यंत्र मिल जाता है जिसके सहारे वह गायब हो सकता है। बाद में अपने देश को बर्बादी से बचाने के लिये वह खलनायक से मुकाबला करता है और उसे हराकर विजयी बनता है।
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