एबीएन सोशल डेस्क। अखिल विश्व गायत्री परिवार शान्तिकुञ्ज तत्वावधान व मार्गदर्शन में आनलाइन स्वाध्याय मंडल प्रतिनिधित्व में तथा अपनी अपनी स्थानीय शक्तिपीठों, मंडलों व गृह तपोवन में स्वाध्याय सहित अनुष्ठान किया। मोक्षदा एकदाशी व्रत सह गीता जयन्ती की तिथि होने से आनलाइन
एकदाशी व्रत जप-अनुष्ठान समूह मंडल ने जप-अनुष्ठान किया।
वहीं अनेक ने 23--12--23 शनिवार को आयोजन कर विधिवत पूजा-पाठ कर श्रीगीता जयन्ती पाठ कर आज रविवार को यज्ञीय अनुष्ठान कर संपन्न किया। कई साधकों ने संकल्पित होकर अपनी आवासीय तपोवन में परिवारजनों सहित इस अवसर पर श्रीमद्भागवत गीतामृत ग्रंथ और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन वृतांत, व्यक्तित्व, चरित्र व दर्शन पर प्रकाश डाला।
बताया गया कि भगवान श्रीकृष्ण हर दृष्टि से महान थे। उनके कर्तृत्व, व्यक्तित्व व चरित्र में से जितना सर्वोपयोगी हो, उसे हम सबको अनुकरणीय अनुसरणीय मानना और करना चाहिए। भगवद्गीता में जीवन के यथार्थ दर्शन के अकूत मूल्यों का संदेश भरा हुआ है। गीता जीवन के मार्ग का मर्म बताती है।
गीता अध्यात्म विद्या का महत्वपूर्ण ग्रंथ है। सात सौ श्लोकों का अठारह अध्यायों में भारतीय धर्म व योग दर्शन का अनुपम प्रतिनिधित्व करता है। परम पूज्य गुरुदेव वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ पण्डित श्रीरामशर्मा आचार्य जी द्वारा श्रीमद्भागवत गीतामृत ग्रंथ के हिन्दी पद्यानुवाद श्लोकों का सस्वर पाठ किया गया।
संबद्ध प्रेरणाप्रद संदेश, तथ्य व भूमिका पर प्रकाश डालकर विधिवत पूजा-पाठ में सर्व देवपूजन और विशेष रूप से भगवान श्रीकृष्ण, सखाओं का आवाहन, श्रीमद्भागवत गीता पुस्तक ग्रंथ एवं गायत्री युग साहित्य पुस्तकों का विधिवत पूजा-पाठ व नमन-वंदन गोद्रव्य अर्पण और षोडशोपचार पूजन व स्वस्तिवाचन पाठ जप-अनुष्ठान आज हवन-यज्ञ विधान पूर्वक करके सर्वत्र मंगलमय वातावरण विस्तार की मंगलमय प्रार्थना व शान्ति-पाठ कर समापन किया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के जय नारायण प्रसाद ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
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