आध्यात्मिक यात्रा है आगमन काल

 

  • आगमन काल का सन्देश

फा सुशील टोप्पो

एबीएन एडिटोरियल डेस्क। हमेशा से आगमन काल ईसाईयों के लिए एक विशेष अवधि होती है, जहां वे बड़े हर्षोल्लास के साथ येसु के जन्म दिवस की तैयारी करते हैं। आगमन का अर्थ होता है किसी के आने की प्रतीक्षा। ख्रीस्तीय लोग अपने मुक्तिदाता और शांति के राजकुमार के दूसरे आगमन की तैयारी करते हुए प्रति वर्ष बड़े धूमधाम से 25 दिसम्बर को येसु ख्रीस्त का जन्म दिन मनाते हैं, जिसे ख्रीस्त जयंती या बड़ा पर्व से भी जाना जाता है।

ईसाईयों के पूजन विधि कलेंडर के अनुसार, आगमन काल के प्रथम रविवार से ख्रीस्तीय नए पूजन वर्ष में प्रवेश करते है। अर्थात आगमन काल का पहला रविवार पूजन-वर्ष का पहला दिन होता है और जिसका समापन ख्रीस्त राजा के पर्व के साथ होता है। आगमन काल चार सप्ताह का पुण्य अवधि होता है। इस समय में, ख्रीस्त विश्वासी गण ईश्वर की मुक्तियोजना और ईसा के जन्म की इस महान घटना को याद करते हुए अपने आप को येसु के स्वागत की आध्यात्मिक तैयारी करते हैं। 

हर ख्रीस्त भक्त अपने जीवन का  मूल्यांकन करता है। प्रभु और अपने पड़ोसियों के साथ अपने सम्बन्ध को सुधारने का प्रयत्न करता है। इसके लिए वह प्रार्थना, मिस्सा बलिदान, पाप स्वीकार संस्कार, पुण्य कार्यों और अन्य धार्मिक कार्यों के माधयम से अपने जीवन को निखारने का प्रयास करता है। अतः हर विश्वासी के लिए यह आगमन काल प्रभु के साथ एक आध्यात्मिक यात्रा है।  

आगमन काल ख्रीस्तीय भाई-बहनों के लिए दो महत्वपूर्ण सन्देश देता है : पहला है आशा का सन्देश। यह अवधि याद दिलाता है कि ईश्वर हमें कभी नहीं छोड़ता है, जब भी हम कठिनाईयों, दुःख, तकलीफ में हों, हताश, निराश हों या अपने जीवन से थके हों। यह अडवेंट अपने विश्वासियों को प्रभु से जुड़े रहकर आशावान बनने के लिए प्रेरित करता है। 

दूसरा सन्देश है हर विश्वासी को अपने जीवन में जागरूक तथा चौकस रहे, क्योंकि आगमन काल प्रतीक्षा का समय है, येसु के आगमन का समय है। चौकन्ना रहने मतलब है प्रभु की शिक्षा के अनुसार जीवन जीने के लिए हमेशा तत्पर रहना। और वही प्रभु से मिल पाएगा जो अपने जीवन में आशावान, मुस्तैदी से प्रभु की इच्छा के अनुसार जीते हुए, प्रार्थना, उपवास, दान, पुण्य का काम करता है। 

आगमन काल अपने विश्वासियों को ईश्वर और अपने पड़ोसी के प्रति विश्वास, आशा, प्रेम और शांति का सन्देश देता है। अतः वही ख्रीस्त जयंती और येसु के शांति को अपने दिल, जीवन और परिवार में अनुभव कर पाएगा जो ईश्वर की उपस्थिति में जीते हुए उनकी आज्ञा के अनुसार जीने के लिए हमेशा तत्पर है।

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