टीम एबीएन, रांची। संसद की सुरक्षा में हुई चूक का असर अब राज्यों की विधानसभा में देखने को मिलने लगा है। मामला झारखंड से जुड़ा है जहां आम जन का प्रवेश अब आसान नहीं होगा। झारखंड विधानसभा का शीतकालीन सत्र 15 दिसंबर से शुरू होने जा रहा है। पांच कार्य दिवस वाले इस सत्र को उपयोगी बनाने और शांतिपूर्ण संचालन के लिए विधानसभा अध्यक्ष ने विधायक दल के नेताओं के साथ बैठक की।
साथ ही बैठक में सुरक्षा को लेकर भी खूब चर्चा हुई। बैठक के बाद जो चीजें सामने आईं उसके मुताबिक बुधवार को संसद में घटित घटना का असर झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र में भी दिखेगा। विधानसभा अध्यक्ष के साथ बैठक में सुरक्षा के सवाल पर हर किसी ने चिंता जतायी। अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने भी ये स्पष्ट कर दिया है कि अनावश्यक व्यक्ति विधानसभा परिसर में आने की जरूरत नहीं। दर्शक दीर्घा में साधारण प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।
नये नियमों पर विधायक के द्वारा लिखित तौर पर की गई अनुशंसा पर ही उनके सुपरिचित व्यक्ति दर्शक दीर्घा तक पहुंच पायेंगे। मतलब साफ है कि दर्शक दीर्घा में प्रवेश अब आसान नहीं होगा। इस बैठक की खास बात ये रही कि पहली बार नेता प्रतिपक्ष के तौर पर बीजेपी के अमर बाउरी शामिल हुए।
हालांकि अमर बाउरी ने ये स्पष्ट कर दिया है कि सदन में जनता के सवालों को लेकर भाजपा कोई समझौता नहीं करने जा रही है। बढ़ते अपराध से लेकर रोजगार और सरकार के वायदों पर सदन के अंदर उसे घेरने का काम करेंगे।
झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र को लेकर सरकार ने भी तैयारी पूरी कर ली है। सीएम हेमंत सोरेन सदन को नेता प्रतिपक्ष मिलने पर खुशी जाहिर करते भी दिखे। वो खुद नेता प्रतिपक्ष के कक्ष में विधानसभा अध्यक्ष के साथ भी नजर आये। सीएम हेमंत सोरेन ने स्पष्ट कर दिया है कि जनता से जुड़े हर सवाल का जवाब देने के लिए सरकार तैयार है।
शीतकालीन सत्र से पहले सालों से चली आ रही परिपाटी के अनुसार विधानसभा अध्यक्ष ने बैठक तो कर ली है, पर इस बैठक का सदन के अंदर संभावित हंगामा पर कितना असर पड़ेगा, इसके लिए थोड़ा इंतजार करना होगा ।
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