टीम एबीएन, पटना। बिहार के जहानाबाद में अपने कोचिंग सेंटर के बाहर से महीने भर पहले लापता हुई 14 साल की नाबालिग बच्ची चेतना (बदला हुआ नाम) को मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले से छुड़ाया गया। मध्य प्रदेश पुलिस, बिहार पुलिस और बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) की कड़ी मशक्कत और सघन जांच के बाद बच्ची को छुड़ाने में कामयाबी मिली।
इस महीने भर के अर्से में बच्ची को बिहार के गया में बेचा गया और फिर मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के एक गांव के 26 साल के एक युवक से उसकी शादी करायी गयी जहां से आखिर में उसे बचाया गया।
पीड़ित बच्ची तीन नवंबर को सुबह आठ बजे अपने कोचिंग सेंटर के लिए निकली थी। लेकिन देर शाम तक जब वह घर नहीं लौटी तो चिंतित परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। लेकिन बच्ची नहीं मिली तो अगले दिन उन्होंने थाने में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करायी।
छुड़ाए जाने के बाद बच्ची ने महीने भर के दौरान रोंगटे खड़े कर देने वाले घटनाक्रम के बारे में जानकारी दी। उसने बताया कि उसके करीबी दोस्त आकाश जिसकी उम्र तकरीबन 20 वर्ष है, ने शादी का झांसा देकर उसे घर छोड़कर जाने के लिए मनाया था।
लेकिन उस दिन आकाश शादी के बहाने अपने दो दोस्तों के साथ उसे जहानाबाद के एक होटल में ले गया जहां उन सभी ने उसके साथ बलात्कार किया। इसके बाद नाबालिग ने आकाश से विवाह के बारे में पूछा तो उसने साफ इनकार कर दिया। सदमे की शिकार चेतना को लगा कि अब वह अपने घर वालों को मुंह नहीं दिखा पायेगी और उसने आत्महत्या करने की सोची।
किसी तरह वह होटल से भाग निकली। वह आत्महत्या करने की सोच रही थी कि तभी उसे मध्य प्रदेश का एक व्यक्ति मिला जिसने भांप लिया कि बच्ची असहाय है और परेशानी की शिकार है। उसने नाबालिग को सब्जबाग दिखाए कि सब ठीक हो जायेगा। कोई रास्ता नहीं देख बच्ची कुछ बेहतर होने की उम्मीद में उसके साथ हो ली।
लेकिन उसके बाद जो हुआ वह साबित करता है कि समाज में चेतना जैसी असहाय बच्चियों के लिए कदम-कदम पर कितने खतरे हैं। वह व्यक्ति बच्ची को बिहार के गया ले गया जहां उसने उसे मध्य प्रदेश के एक आदमी को डेढ़ लाख रुपये में बेच दिया। बच्ची को मारा पीटा गया, यातनाएं दी गईं और उसी दिन उसका जबरन विवाह करा दिया गया।
इसके बाद उसका कथित पति बच्ची को मंदसौर स्थित अपने घर ले गया जहां उसे दिन में बेरहमी से पीटा जाता और रात को बलात्कार किया जाता। उधर, चेतना के पिता ने उम्मीद नहीं छोड़ी। बिहार पुलिस और बीबीए की टीम लगातार लगातार बच्ची की तलाश में जुटी रही।
बीबीए जो कि बाल विवाह मुक्त भारत गठबंधन का अंग है, इस तरह की स्थितियों में फंसे बच्चों को मुक्त कराने के लिए लगातार काम करता रहा है। बाल विवाह मुक्त भारत गैरसरकारी संगठनों का एक देशव्यापी गठबंधन है जो 2030 तक भारत को बाल विवाह से मुक्त कराने के लिए जमीनी स्तर पर काम कर रहा है।
बच्ची की तलाश में सबसे बड़ी सफलता तब हाथ लगी जब पुलिस ने उसे बेचने वाले व्यक्ति का सुराग लगाकर उसे बिहार के अरवल जिले से गिरफ्तार किया। पुलिस ने उसके पास से बच्ची का मोबाइल फोन भी बरामद किया।
गिरफ्तार आरोपी के मोबाइल की जांच में उसके खाते में एक जगह से एक लाख और एक अन्य खाते से 50 हजार की राशि जमा होने की जानकारी मिली। इन खातों की जांच से पुलिस मंदसौर के उस गांव तक पहुंची जहां बच्ची को रखा गया था। आखिर में बिहार और मध्य प्रदेश पुलिस के साथ चेतना के पिता और बीबीए की टीम मंदसौर पहुंची और आधी रात को बच्ची को मुक्त कराया।
बच्ची को खरीदने वाले कथित पति को गिरफ्तार कर लिया है। बच्ची को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया जायेगा जहां उसकी काउंसलिंग की जायेगी। शुरुआत में बच्ची के लापता होने के बाद पुलिस ने सेक्सन 366 ए के तहत मामला दर्ज किया था लेकिन बीबीए अब आरोपियों के खिलाफ बाल दुर्व्यापार यानी ट्रैफिकिंग से संबंधित धाराएं जोड़ने की पैरवी कर रहा है।
देश में बाल विवाह और बच्चों की ट्रैफिकिंग के मामलों के आपस में जुड़े होने की ओर संकेत करते हुए बीबीए के निदेशक मनीष शर्मा ने कहा कि यह एक खतरनाक सच्चाई है कि बाल दुर्व्यापारी चेतना जैसी बहुत सी बच्चियों को विवाह की आड़ में बेच देते हैं जहां उनसे बलात्कार किया जाता है।
इस तरह के आघात और यातना से गुजरने वाला हरेक बच्चा हमारे समाज के चेहरे पर एक तमाचा है। बाल विवाह का खात्मा जरूरी है और यह तभी संभव हो सकता है जब हम इस बुराई की गंभीता को समझते हुए इसके खिलाफ सामूहिक तौर पर युद्धस्तरीय अभियान छेड़ें।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार बिहार में 2019 में लड़कियों के लापता होने के 7299 मामले आये। यद्यपि 2021 में स्थिति में कुछ सुधार देखने को मिला 4578 मामले दर्ज हुए। लेकिन हालात अब भी खतरनाक हैं और बच्चे अब भी असुरक्षित हैं।
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