श्रीमद्भागवत पुराण में विद्या का अक्षय भंडार है : पं अमरनाथ चौबे

 

  • श्रीमद्भागवत दस गुण महापुराण वाला सर्वश्रेष्ठ पुराणों में से एक हैं
  • हमारी मातृशक्ति संस्कार की धुरि और राष्ट्र की रक्षिका हैं: एमएम पाण्डेय
  • लीलाओं से भरा हुआ है,भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन
  • पूर्णाहुति और भंडारा के साथ आज संपन्न होगा सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ

सुदीप्ता मुखर्जी

टीम एबीएन, लोहरदगा। उपनगरी क्षेत्र महादेव आश्रम स्थित बुढ़वा महादेव मंदिर और मंजूरमती हाई स्कूल, लोहरदगा के प्रेक्षागृह परिसर में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के छठे दिन सोमवार को वाराणसी से आए व्यास पंडित अमरनाथ चौबे ने रुक्मणी विवाह का प्रसंग और राम विवाह की झांकी का अलौकिक वर्णन किया। 

कथावाचक व्यास पीठ से कथा की भाव- भंगिमाओं की प्रस्तुति काफी प्रभावकारी ढंग से किया। इससे वहां मौजूद महिलाएं, युवतियां और सभी आयु वर्ग के लोग अपने को झूमने से नहीं रोक पाये।

उन्होंने भारतीय मातृशक्ति को तोड़कर भारत को तोड़ने की कुत्सित प्रयास जो पश्चिमी देशों के द्वारा किया जा रहा है, उनका भी चित्रण किया। सात दिवसीय श्रीमद्भागवत  कथा के छठे दिन सोमवार को पंडित अमरनाथ चौबे ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन लीलाओं से भरा हुआ है। 

द्वारकाधीश श्रीकृष्ण का रुक्मणी विवाह का विस्तार पूर्वक बताते हुए कथा वाचक ने कहा कि शास्त्रों के अनुसार विवाह आठ प्रकार के होते हैं। रुक्मिणी विवाह शास्त्रों के अनुसार ज्येष्ठ मास की शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि के दिन रुक्मिणी विवाह का प्रसंग हुआ था। श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु और रूक्मिणी जी को देवी लक्ष्मी का अवतार माना जाता है।

यह त्योहार भगवान श्रीकृष्ण और देवी रूक्मिणी के विवाह को समर्पित है। दृश्य का कथा वाचन के दौरान मंच पर सुंदर प्रस्तुति दी गयी। जिसे देख उपस्थित श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। कार्तिक माह के अवसर पर इस कार्यक्रम का भक्त आनंद लेकर पुण्य का भागी बन रहे हैं। 

राम विवाह की झांकी ने सभी का मन मोह लिया। यज्ञ के मुख्य यजमान मदन मोहन पांडेय और रीता पांडेय के अलावा वाराणसी के कलाकारों में विद्यानंद तिवारी, राजीव उपाध्याय, दिवाकर पांडेय कौस्तुभ चतुर्वेदी ने साजवाज से भागवत में रौनक है।

इस आयोजन को सफल बनाने में मनोज्ञ पांडेय, अनुपमा निधि पांडेय,ऋषभ पाण्डेय, वत्सा, रुपा पाण्डेय, सुदीप्त मुखर्जी, सुमन राय, राजेंद्र प्रसाद खत्री, कृपा प्रसाद सिंह, शिव शंकर सिंह, राजेंद्र प्रताप देव, नंदकुमार पांडेय, शिव प्रसाद राजगढ़िया, रेणुका गुप्ता, रामस्वरूप प्रसाद, अनिल ठाकुर, अनुराधा कुजूर, ममता अग्रवाल, विनीता कुमारी, शांति कुमारी, सुनीता कुमारी, आदि समस्त युवा जुटे हुए हैं।

पंडित अमरनाथ चौबे ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा में ज्ञान, भक्ति, तथा वैराग्य की महानता के बारे में बताया गया है। इस पुराण में विष्णु और कृष्णावतार की कथाओं के सम्पूर्ण ज्ञान के बारे में वर्णन किया गया है।

श्रीमद्भागवत पुराण में विद्या का अक्षय भंडार है। यह पुराण सभी प्रकार के कल्याण व सुख देने वाला है। श्रीमद्भागवत पुराण हैं। पुराण का अर्थ जो प्राचीन में हुआ हैं, और वर्तमान में उसका अस्तित्व हो। श्रीमद्भागवत कोई पुराण नहीं है बल्कि यह महापुराण है। इस पुराण में दस गुण हैं। सर्व श्रेष्ठ पुराणों में से एक हैं।

संस्कार की धुरि और राष्ट्र की रक्षिका है भारतीय नारी

इसके पूर्व सुबह श्रीमद्भागवत महापुराण की विधिवत् पूजा अर्चना होने के बाद शिक्षाविद और धर्म शास्त्रों के जानकार मदन मोहन पांडेय ने कहा कि भारतीय स्त्री, संस्कार की धुरि और राष्ट्र की रक्षिका है। पश्चिम ने भारतीय नारी के मन पर प्रहार कर संस्कार मिटाने और भारत को मिटाने का प्रयास किया। सनातन धर्म की मातृ केन्द्रित व्यवस्था है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नर से नारायण बनने की प्रक्रिया में माता की भूमिका मुख्य है। पृथ्वी पर भाषा और संस्कार देने वाली मां ईश्वर स्वरुप है। सन्तान को मां से ही सबकुछ मिलता है। मां के संस्कारों से ही बालक सज्जन और दुर्जन बनते हैं। 

पश्चिम ने षड्यंत्र पूर्वक स्वच्छंदता का प्रवेश भारतीय नारियों के मन में कराकर उन्हें परम्परा विमुख बनाने का प्रयास किया। पश्चिमी षड्यंत्रकारी भारतीय नारी के मन से संस्कार मिटाकर भारत को तोड़ने का प्रयास निरन्तर कर रहे हैं। पश्चिम को ज्ञात है कि भारत की रक्षाधुरी स्त्री है। इसीलिए वह स्त्रियों पर प्रहार कर रहे हैं। भारतीय स्त्रियां समर्पण की प्रतिमूर्ति हैं।

स्त्रियां ही धर्म और यज्ञ का आधार हैं। शिवाजी और विवेकानन्द को जो संस्कार उनकी माता ने दिया, वहीं वह बने। सनातन का लक्ष्य जोड़ना है, न कि तोड़ना। भारत माता मातृशक्ति की प्रतीक हैं। इससे स्पष्ट है, कि शक्ति का केन्द्र नारी है। यह सब सनातन संस्कृति की सोच के कारण हुआ।

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