टीम एबीएन, रांची। बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में परिवर्तन निदेशालय (ईडी) के द्वारा छापेमारी की गयी है। मिली जानकारी के अनुसार रांची जेल के अंदर से ही ईडी के अधिकारियों को फर्जी मुकदमे में फंसाने की साजिश रची जा रही थी। एजेंसी ने इससे जुड़े कई साक्ष्य जेल के अंदर से जुटाये हैं।
झारखंड में जमीन, बालू, शराब और अवैध खनन जैसे घपले घोटाले की जांच कर रहे ईडी के अधिकारियों को फर्जी मुकदमे में फंसाने की साजिश रची गयी थी। सूचना के अनुसार ईडी के एक अफसर को धुर्वा थाने के द्वारा एसटी-एससी केस में आरोपित करने के बाद एक बार नये सिरे से एक गंभीर किस्म के आरोप में फंसाने की साजिश जेल से ही रची गयी थी।
जानकारी के अनुसार एक महिला को भी केस दर्ज कराने के लिए तैयार किया गया था, लेकिन एजेंसी को एन मौके पर इसकी सूचना मिल गयी। इस मामले में ईडी के द्वारा कई अहम तथ्य और साक्ष्य जुटाये गये हैं।
सूत्र बताते हैं कि इस साजिश में अवैध खनन और जमीन घोटाले में शामिल प्रेम प्रकाश, अमित अग्रवाल समेत कई दूसरे कैदियों की भूमिका थी। सूचना यह भी है कि जेल में बंद आरोपियों को जेल प्रशासन और बाहर से भी मदद पहुंचायी जा रही थी।
साजिश की सूचना मिलने पर ईडी की टीम रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार शुक्रवार की शाम पहुंची थी। सूचना के मुताबिक जेल गेट पर भी ईडी टीम को काफी देर तक इंतजार करना पड़ा तब जाकर जेल का गेट खुला।
ईडी ने जेल में बंद आरोपियों के वार्ड को खंगाला लेकिन उस दौरान किसी के पास से मोबाइल नहीं मिला। आरोपियों से जेल के भीतर पूछताछ भी की गयी। इससे पहले ईडी ने जमीन घोटाले से जुड़े ईसीआईआर में कोर्ट से जेल में छापेमारी संबंधित वारंट हासिल किया था।
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