जानें करवा चौथ का पौराणिक महत्व...

 

एबीएन सोशल डेस्क। करवा चौथ भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं तथा पूजन करती हैं। करवा चौथ व्रत के नियम अलग-अलग स्थानों के अनुसार अलग झ्र अलग हो सकते हैं। बहुत सी जगह पर इस व्रत को निर्जला किया जाता है मतलब कि व्रत के दौरान पानी नहीं पिया जाता। 

लेकिन बहुत से क्षेत्रों में इस व्रत के दौरान पानी व चाय आदि पी लिया जाता है। इसलिए आप अपने क्षेत्र के अनुसार व्रत का पालन कर सकते हैं। इस व्रत में करवा चौथ व्रत कथा का बहुत अधिक महत्व होता है। व्रत की सफलता के लिए इस व्रत कथा को पढ़ना व सुनना दोनों ही आवश्यक है तथा इस व्रत कथा के द्वारा ही हमें इस व्रत के महत्व के बारे में पता चलता है। 

करवा चौथ व्रत कथा 

एक ब्राह्मण के सात पुत्र थे और वीरावती नाम की इकलौती पुत्री थी। सात भाइयों की अकेली बहन होने के कारण वीरावती सभी भाइयों की लाडली थी और उसे सभी भाई जान से बढ़कर प्रेम करते थे।कुछ समय बाद वीरावती का विवाह किसी ब्राह्मण युवक से हो गया। विवाह के बाद वीरावती मायके आयीं और फिर उसने अपनी भाभियों के साथ करवाचौथ का व्रत रखा लेकिन शाम होते-होते वह भूख से व्याकुल हो उठी। 

सभी भाई खाना खाने बैठे और अपनी बहन से भी खाने का आग्रह करने लगे, लेकिन बहन ने बताया कि उसका आज करवा चौथ का निर्जल व्रत है और वह खाना सिर्फ चंद्रमा को देखकर उसे अर्घ्य देकर ही खा सकती है। लेकिन चंद्रमा अभी तक नहीं निकला है, इसलिए वह भूख-प्यास से व्याकुल हो उठी है। वीरावती की ये हालत उसके भाइयों से देखी नहीं गई और फिर एक भाई ने पीपल के पेड़ पर एक दीपक जलाकर चलनी की ओट में रख देता है। 

दूर से देखने पर वह ऐसा लगा की चांद निकल आया है। फिर एक भाई ने आकर वीरावती को कहा कि चांद निकल आया है, तुम उसे अर्घ्य देने के बाद भोजन कर सकती हो। बहन खुशी के मारे सीढ़ियों पर चढ़कर चांद को देखा और उसे अर्घ्य देकर खाना खाने बैठ गयीं। उसने जैसे ही पहला टुकड़ा मुंह में डाला है तो उसे छींक आ गयीं। 

दूसरा टुकड़ा डाला तो उसमें बाल निकल आया। इसके बाद उसने जैसे ही तीसरा टुकड़ा मुंह में डालने की कोशिश की तो उसके पति की मृत्यु का समाचार उसे मिल गया। उसकी भाभी उसे सच्चाई से अवगत कराती है कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ। करवा चौथ का व्रत गलत तरीके से टूटने के कारण देवता उससे नाराज हो गयें हैं। 

एक बार इंद्र देव की पत्नी इंद्राणी करवा चौथ के दिन धरती पर आयीं और वीरावती उनके पास गयीं और अपने पति की रक्षा के लिए प्रार्थना की। देवी इंद्राणी ने वीरावती को पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से करवाचौथ का व्रत करने के लिए कहा। 

इस बार वीरावती पूरी श्रद्धा से करवा चौथ का व्रत रखा। उसकी श्रद्धा और भक्ति देख कर भगवान प्रसन्न हो गयें और उन्होंनें वीरावती को सदासुहागन का आशीर्वाद देते हुए उसके पति को जीवित कर दिया। इसके बाद से महिलाओं का करवाचौथ व्रत पर अटूट विश्वास होने लगा। 

करवा चौथ व्रत सामग्री 

करवा चौथ व्रत में पूजा के लिए आपको मिट्टी का एक करवा और उसका ढक्कन चाहिए। मां गौरी या चौथ माता और गणेश जी की मूर्ति बनाने के लिए काली या पीली मिट्ठी चाहिए। पानी के लिए एक लोटा, गंगा जल, गाय का कच्चा दूध, दही, देसी घी अगरबत्ती, रूई, एक दीपक, अक्षत, फूल, चंदन, रोली, हल्दी, कुमकुम, मिठाई, शहद, चीनी और उसका बूरा, बैठने के लिए आसन,इत्र, मिश्री, पान एवं खड़ी सुपारी, पूजा के लिए पंचामृत, अर्घ्य के समय छलनी, भोग के लिए फल, हलवा-पूड़ी 

सुहाग सामग्री

महावर, मेहंदी, बिंदी, सिंदूर, चूड़ी, कंघा, बिछुआ चुनरी आदि  

इस साल करवा चौथ 1 नवंबर 2023 को यानि आज मनाया जायेगा। हिंदू महिलाओं के बीच करवा चौथ का बहुत महत्व है। यह दिन पूरे देश में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। हिंदू विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।

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