टीम एबीएन, रांची। अखिल विश्व गायत्री परिवार का आनलाइन स्वाध्याय मंडल प्रतिनिधित्व में नवयुग साहित्य पुस्तकों का दैनिक स्वाध्याय पाठ-संवाद चल रहा है। उनमें एक कैटगरी में महिला मंडल द्वारा स्वास्थ्य संवर्धन कैसे हो का स्वाध्याय पाठ चल रहा है।
इसमें निरोग जीवन, सुस्वास्थ्य कैसे हो, स्वास्थ्य संरक्षण, उसका संवर्धन व लाभ कैसे हो, क्या खायें, न खायें, स्वस्थ रहने के सरल आसन, प्राणायाम-उपाय पर सोमवार से सप्त दिवसीय सत्र आनलाइन शुरू हुआ। इसमें योग, आसन, व्यायाम व प्राणायाम की दिशा, धारा पर प्रकाश डाला गया।
मंगलवार दिन प्रज्ञा अभियान का योग, व्यायाम, आसन प्राणायाम पर अभ्यास हुआ। स्वास्थ्य कैटगरी स्वाध्याय महिला मंडल संचालन प्रतिनिधि दीदी ने बताया कि स्वस्थ और सुखी जीवन मनुष्य की प्रमुख आवश्यकता है।
समाज के किसी भी स्तर में रहने वाला व्यक्ति स्वस्थ सुखी जीवन की अपेक्षा करता ही है। बताया कि स्वास्थ्य केवल शारीरिक ही नहीं, मानसिक और आत्मिक भी होता है। जो लोग केवल शरीर को स्वस्थ रखकर स्वस्थ और सुखी जीवन का लाभ लेना चाहते हैं, वह सफल नहीं हो पाते।
भारतीय जीवन पद्धति तो हमेशा से शारीरिक, मानसिक, आत्मिक स्वास्थ्य का महत्त्व दर्शाती रही है। कहा कि समग्र स्वास्थ्य के लिए योगयुक्त जीवन पद्धति का समर्थन और विकास हमारे भारतीय ऋषियों ने किया है।
दीदी ने बताया कि योगयुक्त जीवन पद्धति में युग निर्माण अभियान जिसे प्रत्यक्ष रूप में ऋषि चिंतन से उभरा हुआ एक व्यापक आंदोलन भी है। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के जय नारायण प्रसाद ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
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