संविधान की रक्षा का संकल्प के साथ आयोजित हुआ दलित समागम

 

  • 4 दिसंबर को संसद मार्च में सैकड़ों की संख्या में दिल्ली चलो का आह्वान

टीम एबीएन, झुमरीतिलैया। देश में दलितों के उपर बढ़ते अत्याचार, संविधान को बदलने की साजिश व एससी एसटी अल्पसंख्यक तथा पिछड़े वर्गों की योजनाओं में लगातार हो रही कटौती के खिलाफ व आरक्षण की रक्षा के लिए दलित शोषण मुक्ति मंच (डीएसएमएम) के तत्वावधान में रविवार को साहु भवन झुमरीतिलैया में संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के संकल्प के साथ जिला स्तरीय दलित समागम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डीएसएमएम के जिलाध्यक्ष दिनेश रविदास ने किया। जबकि संचालन जिला सचिव शम्भु पासवान ने किया।

सर्वप्रथम भीम आर्मी के रंजीत कुमार राम के द्वारा संविधान की प्रस्तावना का पाठ किया गया। डीएसएमएम के राज्य सचिव दिनेश रविदास ने दलित समागम के उदेश्य पर प्रतिवेदन रखा।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि देश की आजादी के 76 वर्ष बीत जाने के बाद भी सामाजिक उत्पीडन की सबसे गंभीर मार दलितों, अतिशुद्रों या अनुसूचित जातियों को झेलना पड़ रहा है। पिछले नौ वर्षों से दलितों, आदिवासियों, पिछड़े व अल्पसंख्यकों को शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित करने का काम किया जा रहा है।

केंद्र सरकार के द्वारा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के खिलाफ अत्याचार निवारण कानून को निष्प्रभावी बनाने के लिए संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना और संघीय ढांचे को कमजोर करने के लिए पूरा जोर लगा दिया है और लोकतंत्र की रक्षा करने वाली तकरीबन सभी संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर किया है।

यहां तक कि न्यायालय को भी नहीं बख्शा जा रहा है। जहां एक ओर जन कल्याणकारी योजनाओं में कटौती की जा रही है, वहीं दूसरी ओर देश के दलितों के उपर व्यापक रूप से अत्याचार बढ़ रहा है। संविधान की शपथ लेने वाली यह सरकार लगातार संविधान को कमजोर कर रही है ऐसे वक्त में तमाम दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यकों को एक मंच पर आने की जरूरत है। 

कार्यक्रम को सीटू के राज्य सचिव संजय पासवान, मजदूर नेता प्रेम प्रकाश, आंगनबाड़ी नेत्री मीरा देवी, वामसेफ के दुर्गा राम, किसान सभा के ग्यासुद्दीन अंसारी, चिकित्सा कर्मी दिनेश कुमार दास आदि ने सम्बोधित किया।

समागम में दलितों की मांगों पर देशव्यापी हस्ताक्षर अभियान में कोडरमा जिला से दस हजार हस्ताक्षर एकत्रित करने व 04 दिसंबर को संसद मार्च में सैकड़ों की संख्या में दिल्ली चलो का आह्वान किया गया।

समागम में दलितों को ग्रामीण और शहरी आम संसाधनों पर समान हिस्सेदारी के लिए कानून बनाने, भोजन सुरक्षित पेयजल कपड़े आवास सार्वजनिक स्वास्थ्य सामाजिक सुरक्षा और सामाजिक सेवाओं सहित दलित महिलाओं और पुरूषों के कल्याण के अधिकारों को सुनिश्चित करने, दलितों को जीवन निर्वाह के लिए 5 एकड़ खेती योग्य भूमि देने, पूर्व में दलितों को मिले भुदान, बंदोबस्त में प्राप्त जमीन का रशीद काटने, नई शिक्षा नीति को वापस करने और सभी दलितों के लिए अनिवार्य, मुफ्त और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा तुरंत लागू करने, जाति उन्मूलन सुनिश्चित करने, युद्ध स्तर पर दलितों के सभी बैकलॉग रिक्तियों को सिर्फ अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों से तुरंत भरने, राज्य में एससी एसटी के लिए जाति प्रमाण पत्र हेतु वर्ष 1950 का खतियानी दस्तावेज की बाध्यता समाप्त करने, दलितों के मुकदमों को फास्ट ट्रैक कोर्ट से निष्पादन करने, बंदोबस्त भूमि पर कब्जा दिलाने, एससी एसटी कर्मचारियों को पद्दोनति देने, राज्य में अनुसूचित आयोग का गठन करने, दलितों के विकास के लिए व्यापक उप योजना बनाने, वनाधिकार अधिनियम के तहत वन भूमि पर बसे दलितों को जमीन का पट्टा देने आदि मांगों का प्रस्ताव पारित किया गया।

कार्यक्रम में भीखारी तुरी, संजय कुमार दास, राहुल कुमार, सुरेश कुमार, रंजीत राम, बाबूलाल पासवान, सरफराज खान, टेकलाल दास, तानेश्वर राम, भुना भूइयां, कारू दास, जितेंद्र दास, नागेश्वर दास, भीम आर्मी के कृष्णा पासवान सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

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