टीम एबीएन, कोडरमा। जिले के जानेमाने चिकित्सक परिमल तारा की पत्नी डॉक्टर प्रीति रानी ने महाअष्टमी को बेटी को जन्म देने के बाद दुनिया को अलविदा कह दिया। नवमी को स्थानीय श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। डॉ प्रीति रानी की चिता अब ठंडी हो चुकी है। पर उनकी ठंडी चिता से कई सवाल सुलग रहे हैं।
मृत डाक्टर के पति के द्वारा फेसबुक पर आखिर क्यों? और मेरा क्या कसूर लेख पढ़कर लोगों के बीच कई तरह की चर्चाएं हो रही है। अपने लेख में डाक्टर परिमल ने डाक्टर अलंकृता मंडल पर आरोप लगाते हुए उनके द्वारा आपरेशन के दौरान की गयी अनदेखी व कमियों को उजागर किया है। अब सवाल यह भी है कि जब एक डाक्टर के साथ ऐसी घटना घट सकती है, तो शहर के आम मरीजों का क्या?
इस बारे में प्राप्त जानकारी के अनुसार डॉ प्रीति रानी प्रसव के लिए महाअष्टमी अर्थात 22 अक्टूबर को तिलैया के शीला रानी होस्पिटल में भर्ती हुई। यह अस्पताल डॉ अलंकृता मंडल का है।
डॉ परिमल के अनुसार डॉ प्रीति ने डॉ अलंकृता से कहा था कि आपरेशन के वक्त मेरे पति को साथ में रखना है। किंतु डॉ अलंकृता ने ऐसा नहीं किया और डॉ परिमल की अनुपिस्थिति में ही प्रीति का आपरेशन कर दिया। जब बच्चे के रोने की आवाज आयी, तो डॉ परिमल आपरेशन थिएटर में पहुंचे।
उनका कहना है कि आपरेशन से पूर्व पेशेंट को जो इंजेक्शन लगाया जाता है, वह प्रीति को नहीं लगाया गया था। उन्होंने ओटी में केवल लाइफ सेविंग एनेसथेटिक मेडिसिन ही पाया। डॉ परिमल का कहना है कि जब डॉ प्रीति ने ओटी में उन्हें भी रखने को कहा था, तो डॉ अलंकृता ने उनकी गैरमौजूदगी में ही आपरेशन क्यों किया? आपरेशन से पहले जिस इंजेक्शन का प्रयोग होता है, वह क्यों नहीं लगाया गया?
डॉ परिमल का कहना है कि जब वो ओटी में गये तो उन्हें कहा गया कि यूट्रस सील चुका है। 20 मिनट बाद वे फिर ओटी में जाते हैं तो यूट्रस बाहर ही देखा। क्यों? डॉ परिमल ने कई सवाल किये हैं कि डॉ प्रीति की मौत के लिए जिम्मेवार कौन है? डॉ अलंकृता या उन पर किया विश्वास? डॉ परिमल ने फेसबुक समेत अन्य सोशल मीडिया पर ऐसे कई पोस्ट डाले हैं।
इस बारे में डॉ अलंकृता के पति विवेक का कहना है कि मेरे यहां कोई लापरवाही नहीं बरती गयी है। सब कुछ नार्मल था। डॉ परिमल और उनके नर्स वहीं थे। हमलोग पूजा करने के लिए निकले ही थे कि मेरी नर्स का फोन आया कि डॉ प्रीति का आक्सीजन लेवल कम हो रहा है। लौटकर आने के बाद पता चला कि उनके ही नर्स ने डॉ प्रीति को इंजेक्शन लगाया।
डॉ प्रीति ने कहा कि उन्हें इंबोलिज्म हो गया है। यानि इंजेक्शन से एयर नहीं निकाले जाने से ऐसा होता है। उन्हें केयर होस्पिटल में शिफ्ट किया जाने लगा, तभी अटैक आ गया। अस्पताल में जाने के बाद दुबारा अटैक आ गया और वे चल बसीं।
विवेक का कहना है कि वे दोनों खुद डॉक्टर थे, तो अपने यहां आपरेशन क्यों नहीं कराया? उनके अगल-बगल में और भी क्लिनीक हैं वहां उन्हें क्यों भर्ती नहीं कराया? बता दें कि अगर मामले की सही से जांच करायी जाये तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा।
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