जानें मां दुर्गा की आठवीं शक्ति महागौरी की पावन कथा

 

राजकुमारी पाण्डेय

  • महागौरी : मां दुर्गा की आठवीं शक्ति की पावन कथा

एबीएन सोशल डेस्क। नवरात्रि में आठवें दिन महागौरी शक्ति की पूजा की जाती है। महागोरी नाम से इसलिए प्रकट है कि इनका रूप पूर्णतः गौर वर्ण है। इनकी उपमा शंख, चंद्र और कुंद के फूल से दी गयी है।

अष्टवर्षा भवेद् गौरी यानी इनकी आयु आठ साल की मानी गयी है। इनके सभी आभूषण और वस्त्र सफेद हैं। इसीलिए उन्हें श्वेताम्बरधरा कहा गया है। 4 भुजाएं हैं और वाहन वृषभ है इसीलिए इनको वृषारूढ़ा भी कहा गया है।

इनके ऊपर वाला दायें हाथ में अभय मुद्रा है तथा नीचे वाला हाथ त्रिशूल धारण किया हुआ है। ऊपर वाले बायें हाथ में डमरू धारण कर रखा है और नीचे वाले हाथ में वर मुद्रा है। इनकी पूरी मुद्रा बहुत शांत है। 

पति रूप में शिव को प्राप्त करने के लिए महागौरी ने कठोर तपस्या की थी। इसी वजह से इनका शरीर काला पड़ गया लेकिन तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इनके शरीर को गंगा के पवित्र जल से धोकर कांतिमय बना दिया। उनका रूप गौर वर्ण का हो गया। इसीलिए ये महागौरी कहलायीं।

ये अमोघ फलदायिनी हैं और इनकी पूजा से भक्तों के तमाम कल्मष धुल जाते हैं। पूर्वसंचित पाप भी नष्ट हो जाते हैं। महागौरी का पूजन-अर्चन, उपासना-आराधना कल्याणकारी है। इनकी कृपा से अलौकिक सिद्धियां भी प्राप्त होती हैं।

महागौरी के पूजा विधि और भोग

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद साफ- स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • मां की प्रतिमा को गंगाजल या शुद्ध जल से स्नान करायें।
  • मां को सफेद रंग के वस्त्र अर्पित करें।
  • मां को स्नान कराने के बाद सफेद पुष्प अर्पित करें।
  • मां को रोली कुमकुम लगायें।
  • मां को मिष्ठान, पंच मेवा, फल अर्पित करें।

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