एबीएन डेस्क। अपना सारा जीवन गरीबो एवम जनता के सेवा में लगा देने वाले हेमेंद्र प्रताप देहाती जीका जन्म आजादी के ठीक 15 वर्ष पहले 1932 में सोनपुरा राजपरिवार भवनाथपुर के परसोडीह पलामू में हुआ था। जब ये सात साल के थे उसी वक्त उनको यह एहसास हो गया था कि जो ब्यक्ति परिवार के साथ घनिष्ट सम्बंध रखता है जीवन के अंतिम समय पर प्राण त्यागने के समय उसे बहुत कष्ट होता है। हेमेंद्र प्रताप देहाती जी का जन्म सोनपुरा राजपरिवार में हुआ था। पिता का नाम थानेंद्र नाथ शाही माता का नाम उटीम राजकुंवर थी। बचपन मे उन्हें किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हुई। श्री देहाती की शिक्षा दीक्षा घर पर हुई थी। वे कभी स्कूल नही गए थे बल्कि उनको काशी लाल श्रीवास्तव, बच्चा सिंह, खैरवा चंद्रिका सिंह, जैसे गुरु उनको घर पर ही पढ़ाने आते थे। देहाती जी की राजनीतिक सफर तो 1949 में शुरू हो चुकी थी। वे 1958 से लेकर 1969 तक परसोडीह पंचायत के मुखिया रहे थे। ये 1962 के विधानसभा चुनाव में भाग लेते है। उंस समय ये मोटरसाइकिल से ही ये चुनाव प्रचार करते थे। इनके पास चार पहिया वाहन नही थी। इनके समर्थक कंधे पर बैटरी और लाउडस्पीकर को ढो कर ले जाया करते थे। फिर 1967 में पलामू में भीषण आकाल एवं सूखा पडा था। पूरे पलामू में त्राहिमाम त्राहिमाम होने लगा। लोगों की भूख और प्यास से जान जाने लगी। लोग रेहड़ से ही सिंचाई का काम किया करते थे। जब पलामू में अकाल पड़ा था उसी समय झारखंड़ में चापाकल एवम सिंचाई के लिए पंप का प्रयोग शुरू हुआ। वे बताते हैं कि अकाल के समय गिधौर, मुंगेर राजपरिवार के सदस्य कुमार सुरेश सिंह जी रांची के कमिश्नर थे एवम जी पी मल्लिक एसडीओ थे उन दोनों ने ही आकाल में काफी मदद की। उनके योगदान को वे आज भी नहीं भूलते है। 1969 का विधानसभा का जब उपचुनाव हुआ तो भवनाथपुर से फिर से उम्मीदवार बनाया। ये चुनाव जीत गए। श्री देहाती जी को भारी मतों से अपना विधायक के रूप में जनप्रतिनिधि चुना और पलामू की आवाज बनाकर लोकतंत्र के मंदिर बिहार विधानसभा में भेजा गया था और इन्होंने पलामू की जनता को निराश भी नही किया। सयुंक्त सोशलिस्ट पार्टी साधन विहीन पार्टी थी। पलामू में उतरी कोयल, कनहर, सोन, अमानत सहित कई छोटी बड़ी नदियां बहती है। लेकिन ये नदियां गर्मियों में सुख जाती है। यहां के किसानों को सालों भर अपने खेतों की सिंचाई के लिए पानी नही मिल पाता है। यहां यदा कदा सूखा या अकाल देखने को मिल जाता है। इस समस्या से समाधान पाने हेतु छोटी छोटी नदियों पर चेक डैम बनाया गया है। उतरी कोयल नदी जो पलामू की सबसे बड़ी नदी है और यह आगे चलकर सोन नदी से मिल जाती है। इस पर बांध बनाने की योजना बनाई गई थी। लेकिन तत्कालीन बिहार सरकार ने इस पर रोक लगा देती है और बनाई गयी योजना अधर में लटक गई। श्री देहाती जी सरकार की इस रवैया से नाराज हो कर विधानसभा के अंदर ही भूख हड़ताल पर चले गये थे। यह बात है गर्मी के 30 जून 1970 की। विधानसभा की कार्यवाही समाप्त होने के पश्चात सभी विधायक,कर्मचारी अपने अपने घर चले जाते है। श्री देहाती जी अनशन पर बैठे ही रहते है। मुख्यमंत्री श्री देहाती जी को अपने चेम्बर में बुलाते है और अनशन तोड़ने का आग्रह करते है। यह उनके संघर्षशील होने का उदाहरण मात्र है। बांध निर्माण को लेकर एक कुडुक डैम समिति का गठन कर देते है। समिति को 6 महीने में रिपोर्ट सौपना था। लेकिन सौपा नहीं जा सका। हर बार करोडों रुपये खर्च करके प्रोजेक्ट बनाया जाता था। लेकिन काम नही हो पा रहा था। इन चीजों से आजिज होकर श्री देहाती जी इस मुद्दे को लेकर 2009 में हाई कोर्ट चले गए। 2013 में अवकाश प्राप्त जज की अध्यक्षता में एक कमिटी बना दी गयी और यह कमिटी अपना काम कर रही है। केंद्र सरकार से अनुमति मिल गयी है लेकिन राज्य सरकार से अभी तक कोई अनुमति नही मिली है। लेकिन उन्हें पूरा विश्वास है कि उनका 1970 से लागातर किये गए आंदोलन इस डैम को लेकर बेकार नही जाएगी। वह अवश्य ही पूरा होगा। जब झारखंड अलग राज्य नही बना था उस समय उन्होंने बिहार के पूर्व विधायकों के सहयोग से एक यूनियन बनाये थे एवम पूर्व विधायकों की हक की लड़ाई लड़ते रहे।उनको उनका हक दिलवाया। जब झारखंड़ अलग राज्य बना। तो वे झारखंड़ के सभी एक्स एमएलए का एक यूनियन पूर्व विधायक परिषद बनाये उसे निबंधित कराया और यहां के पूर्व विधायको की समस्यओं को लेकर मुखर होकर आवाज उठाते रहे। पूर्व विधायको को पेंशन,चिकित्सा सहित अन्य मांग को लेकर लागातर सरकार से मिलते रहे और मांग करते रहे। आज उनको बड़ी खुशी का अनुभव होता है कि झारखंड के पूर्व विधायकों को जो सुविधा झारखंड़ में मिलता है वो सुविधा भारत की अन्य किसी राज्यों के पूर्व विधायकों को नही मिलता है। जब भवनाथपुर के विधायक एवम उनके दूसरे पुत्र भानुप्रताप शाही जी जेल चले गए थे तो उनके स्थान में मधु कोड़ा की सरकार में उनके पिता श्री हेमेंद्र प्रताप देहाती को सितंबर 2005 में झारखंड सरकार में स्वास्थ्य मंत्री बनाये गए थे। मंत्री रहते हुए वे अपने कार्यकाल में 6 नए अस्पताल का निर्माण करवाया था। पलामू में 3, देवघर में 2 एवम दुमका में 1 अस्पताल का निर्माण करवाया था। वे बताते हैं कि उनके मंत्री रहते एक बिल आया था कि केंद्र प्रशासनिक अधिकारी (आइएएस) के खिलाफ सरकार तब तक कोई कार्रवाई नहीं कर सकती है जबतक आइएएस कमेटी से एक्शन लेने की स्वीकृति नहीं मिल जाती है। उस बिल का श्री देहाती ने विरोध किया था और बदल दिया था। उस समय उनको सभी मंत्रियों का साथ मिला था और उस बिल को निरस्त करने में सफलता मिली थी। (लेखक महासचिव, बड़कागढ़ रैयत जनमंच से जुडे हैं।)
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