टीम एबीएन, रांची। रांची में एसटी के दर्जा की मांग को लेकर कुर्मी समाज के लोगों ने रेल रोको आंदोलन का आगाज किया। झारखंड के कई स्टेशनों में रेल रोक कर विरोध प्रदर्शन कुर्मी समाज कर रहा है। समाज के लोग सिल्ली, गोमो समेत राज्य के कई स्टेशनों में अपनी मांगों को लेकर लगातार विरोध दर्ज कराया है।
उनके विरोध और आंदोलन से झारखंड, बंगाल और उड़ीसा में 175 से भी ज्यादा ट्रेन प्रभावित होंगी। कुर्मी समाज के लोगों के आंदोलन को देखते हुए रांची रेल मंडल ने रांची स्टेशन से खुलने वाली चार ट्रेनों को रद्द किया है और कई ट्रेनों के रूट बदल दिये गये हैं। जिसके चलते यात्रियों को काफी परेशानी हो रही हैं।
धनबाद में कुड़मी संगठन के रेल टेका आंदोलन को लेकर प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट है। नेताजी सुभाषचंद्र बोस जक्शन गोमो में कुड़मी संगठन ने रेल का चक्का जाम करने की घोषणा की थी। जिसे लेकर गोमो स्टेशन के सभी एंट्री गेट सहित रेलवे ओवरब्रिज के पास सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है।
रेल पुलिस, जिला पुलिस, रेलवे रिजर्व फोर्स, जिला पुलिस रिजर्व फोर्स की तैनाती कर जगह की गयी है। वहीं, रेल डीएसपी घूम घूम कर सभी ब्रेकटिंग स्थल पहुच जायजा ले रहे हैं। साथ ही आवश्यक निर्देश दिए। रेल डीएसपी साजिद ने कहा कि कुड़मी संगठन ने रेल चक्का जाम करने की घोषणा की है। जिसे लेकर रेल प्रशासन पुरी तैयारी कर रखी है।
रेल, जिला पुलिस बल के साथ सभी आवश्यक व्यवस्था की गयी है। आंदोलनकारी लोकतांत्रिक तरीके से अपना आंदोलन करेंगे तो रेल प्रशासन सहयोग करेगी, लेकिन अगर आंदोलनकारी जबरन लोकतांत्रिक तरीके से हट कर कुछ करने तो शक्ति उपयोग भी किया जायेगा।
सरायकेला में भी आदिवासी कुड़मी समाज के आंदोलन का असर देखने को मिल रहा है। जिले के नीमडीह स्टेशन पर कुड़मी समाज ने आंदोलन की चेतावनी दी थी। जिसको देख पुलिस और जिला प्रशासन दोनों हाई अलर्ट पर हैं। स्टेशन परिसर समेत आसपास के पूरे क्षेत्र को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है।
आंदोलन को देखते हुए प्रशासन ने स्टेशन और आसपास के क्षेत्र में धारा 144 लागू कर दी है। रघुनाथपुर मोड़ से ही स्टेशन तक पुलिस बलों की तैनाती कर दी गयी है। यह भी जानकारी मिल रही है कि सरायकेला में कुड़मी समाज के लोगों ने पुलिस पर पथराव किया, जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया है। नीमडीह में रेल रोको आंदोलन के दौरान ये लाठीचार्ज हुआ है।
वहीं, कुड़मी विकास मोर्चा के अध्यक्ष शीतल ओहदार ने कहा कि सरकार जितनी तत्परता और ताकत से आंदोलनकारीयों को रोकने का प्रयास कर रही है। उतनी तत्परता से उन्हें आदिवासी का दर्जा दिलाने में लगाती, तो आंदोलन करने की जरुरत ही नहीं होती।
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