जितना विनम्र बनेंगे, उतना ही क्षमता बढ़ेगा : बालांजिनप्पा

 

  • हिंदी दिवस पूर्व संध्या पर आयोजित अभिनंदन समारोह में शिक्षकों को किया गया सम्मानित
  • भारतीयम् कार्यक्रम के तहत लघु भारत सांस्कृतिक कार्यक्रम का हुआ आयोजन

टीम एबीएन, लोहरदगा। एमजी रोड लोहरदगा स्थित डिवाइन स्पार्क पब्लिक स्कूल में मंगलवार को हिंदी दिवस के पूर्व संध्या के उपलक्ष में आयोजित समारोह में स्कूल के शिक्षक- शिक्षिकाओं और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर स्कूल के बालक- बालिकाओं के द्वारा शिक्षकों के सम्मान में लघु भारतीयम् सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत देश के विभिन्न प्रांतो के लोक नृत्य- संगीत के अलावा योग और महापुरुषों के व्यक्तित्व पर संभाषण किया गया।

समारोह का शुभारंभ अतिथि समाजसेवी, वरिष्ठ पत्रकार, स्पोर्ट्स प्रमोटर-सह- शिक्षाविद् दीपक कुमार मुखर्जी और वीके बालान्जिनप्पा ने संयुक्त रूप से किया। 

वीके बालांजिनप्पा ने अभिभावकों और बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि दृढ़ निश्चय से कोई काम असंभव नहीं है। हर बच्चे में कुछ न कुछ नैसर्गिक गुण होता है। उसे हम शिक्षक और बच्चे मिलकर संकल्पित होकर सिद्धि तक पहुंचने का काम करते हैं। 

हमेशा बड़ों से शिक्षा प्राप्त करते रहने की जरूरत है। बच्चे जितना विनम्र बनेंगे, उनकी क्षमता उतना ही बढ़ेगी। मनुष्य की महानता बुराई ग्रहण करके उसे विसर्जित कर देने में है। बुराई जैसे दूषित चीजों का मनन करना मूर्खता है। 

जिस तरह पेड़ में पत्ते पीले पड़ जाते हैं, तो उसे पेड़ त्याग कर देता है। इस तरह मनुष्य को पेड़ से भी अधिक ज्ञान के लिए यत्न करना चाहिए। ज्ञान की अनुभूति के लिए शिक्षकों पर भरोसा और विश्वास करना जरूरी है। 

दरअसल, किस्मत लेकर आना और कर्म लेकर जाने का नाम ही जिंदगी है। जीवन में जिस दिन हम सभी यह समझ गए की हमारे हार और जीत में हम स्वयं जिम्मेवार हैं। उसे दिन हम सभी सफलता के राह पर अग्रसर होंगे, इसे कोई रोक नहीं सकेगा।

स्कूल की डायरेक्टर शामी बालान्जिनप्पा ने कहा कि महान गुरु वही होता है, जो मिट्टी से कुम्हार के जैसा सुन्दर मुर्ति का निर्माण करता है। शिक्षक अपना अंतर मन ज्ञान और प्रतिभा को अपने छात्र - छात्राओं को समर्पित करता है। 

बच्चों के भविष्य का और चरित्र निर्माण करने वाला ही दार्शनिक व्यक्ति शिक्षक होता है। भाषा, जाति और संप्रदायिक वाद से हटकर बच्चों को बेहतर नागरिक बनाने को कोशिश हम सभी को करना है। आप इंजिनियर हो, डॉक्टर हो,  अधिकारी हो कुछ भी हो लेकिन आपका हृदय में देश के प्रति गर्व और त्याग के लिए सदैव तत्पर रहना है।

उन्होंने कहा कि गुरु के बिना जीवन व्यर्थ होता है। यह युग प्रतिस्पर्धा का है। इसमें बच्चों को सर्वांगीण विकास के लिए प्रयत्न करना है। अपने माता-पिता गुरु और बड़ों का आदर - सम्मान करना अत्यन्त जरूरी है।

समारोह विविध रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। अतिथि अतिथियों अभिभावकों और साथी विद्यार्थियों की खूब वाहवाही विद्यार्थी कलाकारों ने लूटी। जिसमें मैजिक शो, नागपुरी नृत्य शास्त्रीय नृत्य, मणिपुरी नृत्य, शिकारी नृत्य कव्वाली कार्यक्रमों से लोग  मोहित हुए।

इस कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रिंसिपल चंद्रशेखर प्रसाद, निकेत साहू, मनीषा, रीतिका, साक्षी, महविश, नीदा, नूरजहां, सारा, असीता, पुष्पा, अंशु, सुशीला, यतिराज जायस,  अली, हमन, मोबिन अंसारी, जानकी देवी, जीवन साहू, अयाज करीम आदि लोगों ने सहयोग किया। कार्यक्रम में अभिभावकों के अलावा बड़ी संख्या में क्षेत्रीय और प्रबुद्ध नागरिक मौजूद थे।

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