टीम एबीएन, रांची। श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के पर्युषण महापर्व के आज प्रथम दिन खाद्य संयम दिवस की आराधना करते हुए तेरापंथ धर्म संघ के महातपस्वी आचार्य श्रीमहाश्रमण जी के द्वारा भेजे गये उपासकद्वय स्वाध्यायी श्रीमान धर्मचंदजी बाफना एवं मोहनलालजी सामसुखा ने आज धमार्नुरागी भाइयों एवं बहनों संबोधित किया।
उपासक धर्मचंद बाफना ने बताया कि पर्युषण पर्व को विश्व को शांति प्रदान करने वाला, समस्त जीव को अपने समान समझने का, आत्मा का निरीक्षण करने वाला पर्व बताया गया है, इसे त्याग और संयम से मनाना है।
खाद्य संयम दिवस की महत्ता बताते हुए कहा कि आहार का अध्यात्म से गहरा संबंध है, आहार लेने के बाद मन प्रसन्न रहे, इंद्रिय प्रसन्न रहे, कार्य करने की क्षमता बनी रहे यह परिमित भोजन है। पाचन तंत्र व उत्सर्जन तंत्र को स्वस्थ रखना आवश्यक है। मस्तिष्क से काम लेना है तो आहार संयम समझना ही पड़ेगा।
उपासक मोहनलाल जी सामसुखा ने भगवान ऋषभ देव व उनके कालचक्र के बारे में जानकारी दी। मांगलिक के बाद प्रवचन समाप्त हुआ। महिला मंडल ने गीतिका प्रस्तुति की। पर्युषण पर्व के दौरान लोग तपस्या भी कर रहे हैं, आज विशाल दस्सानी के 11 उपवास था।आज दोपहर में ज्ञानशाला एवं शाम में बच्चों के लिए धार्मिक प्रश्नोत्तरी, भजन आदि का आयोजन किया गया।
आज प्रवचन में जैन धर्म के सभी सम्प्रदायों के श्रावक अच्छी संख्या में उपस्थित थे!समाज के काफी लोग उपस्थित थे, आज मुख्य रूप से अमरचंद बेंगाणी, लाल चंद बोथरा, विमल दस्सानी, प्रकाश चंद नाहटा, मोहनलाल पींचा, पंकज बोहरा, कमलेश संचेती आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी सुरेश जैन ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
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