चपरासी के वेतनमान पर शिक्षक गढ़ेंगे झारखंड के नौनिहालों का भविष्य

 

शिक्षक दिवस विशेष  

  • शिक्षक दिवस पर शर्मसार झारखंड की शिक्षा जगत, पूर्ण शिक्षक का दर्जा के लिए अनवरत 14 दिन से अनशन पर सहायक अध्यापक, शिक्षक दिवस पर करेंगे भिक्षाटन  

टीम एबीएन, कोडरमा। राष्ट्र निर्माता के नाम से पहचाने  जाने वाले देश के शिक्षकों के ऋण चुकाने एवं उनके सम्मान समृद्धि और मानव जाति के उत्थान में उनकी अपार ईश्वरीय तुल्य देन को नमन करने के उद्देश्य से हर राज्य की सरकारें शिक्षक दिवस पर उन्हें प्रत्येक वर्ष अलग-अलग उपहार से नवाजती है।

ताकि वह जीवन में सुख और समृद्ध होकर देश के भविष्य को समर्पित रूप से गढ़ें, और राज्यों समेत संपूर्ण राष्ट्र को चांद और सूरज ही नहीं बल्कि अन्य अविश्वसनीय उपलब्धियों तक पहुंचा कर भारत को विश्व गुरु बनने की राह प्रशस्त कर सके।

परंतु झारखंड राज्य की सरकारे गुरु के महत्व से अनभिज्ञ शिक्षक समुदाय के आने वाले भविष्य राज्य के टेट उत्तीर्ण सहायक अध्यापक हो या हजारों बेरोजगार युवा वर्ग सभी को ना ही समझने की कोशिश की बल्कि उनके पूर्ण अधिकार और सम्मान से भी कोसों दूर रखने से झारखंड की शिक्षा जगत शर्मसार हुई है।

विडंबना है कि ऐतिहासिक निर्णय लेने वाले झारखंड की महा गठबंधन की सरकार ने झारखंड में आने वाले शिक्षकों के लिए एक ऐसी लकीर खींच दी है जिनके शिक्षक बनने से पूर्व उनके पूर्ण अधिकार और सम्मान को बौना कर दिया है। 

बताते चले की झारखंड में प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में 4,200 से कटौती कर 2,400 पे ग्रेड करते हुए लगभग चपरासी के वेतनमान को लागू कर झारखंड की सरकार ने शिक्षक दिवस से पूर्व राज्य में बनने वाले शिक्षकों के सम्मान और अधिकार को आधा करने जैसे उपहार से नवाजने जैसा ऐलान किया गया है। 

हालांकि इसका दूरगामी परिणाम इस पिछड़े राज्य में काफी गहरा दुष्प्रभाव छोड़ेगा। 9 घंटे सहित कमीशन स्तर के सिलेबस व अन्य खामियों से भरे सहायक आचार्य नियमावली का बहिष्कार करते हुए टेट उत्तीर्ण सहायक अध्यापक सीमांत घोसाल के नेतृत्व में अपने 50 फीसद आरक्षण पर सीधे समायोजन की मांग पर अनशन पर बैठे है, वही गैर टेट उत्तीर्ण अभ्यर्थी 2012 नियुक्ति नियमावली के आधार पर नियुक्ति हेतु न्याय के लिए हाई कोर्ट की शरण में है। 

इधर, आंदोलनरत सीमांत घोषाल ने कहा की सहायक शिक्षक नियुक्ति नियमावली को समाप्त करते हुए बिना शिक्षकों से मंतव्य लिए सरकार रोलेक्ट एक्ट जैसे काले कानून समायोजन तक शिक्षकों की अग्निपरीक्षा जारी रहेगी। 

आचार्य नियुक्ति नियमावली को राज्य में लागू कर दी है, जिस नियमावली का पूरे झारखंड में विरोध हो रहा है। हालांकि ये उत्तीर्ण अध्यापकों को सत्ता पक्ष के सभी विधायकों और मंत्रियों का समर्थन प्राप्त है, फिर भी राज्य के मुखिया और मुख्य सचिव का इस गंभीर  मामले पर संज्ञान नहीं लेना हैरान करता है।

बहरहाल, रातों रात नियमावली में फेरबदल कर शिक्षकों के ऊपर 7 वर्ष बाद फिर से परीक्षा लेने के प्रावधान में बदलाव करते हुए 2012 के अनुसार काउंसलिंग कर शिक्षक दिवस के उद्देस्य को पूरा कर शिक्षकों को सम्मान और अधिकार दे संतुष्ट कर सरकार आखिर कब नवाजती है।

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