पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का वैज्ञानिक परीक्षण आवश्यक : डब्ल्यूटीओ

 

एबीएन हेल्थ डेस्क। विश्व स्वास्थ्य संगठन-डब्ल्यूटीओ ने पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के कठोर वैज्ञानिक परीक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा है कि सभी के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए इनका समग्रता और बेहतर समझदारी के साथ आकलन किया जाना चाहिए। 

आयुष मंत्रालय ने सोमवार को यहां बताया कि डब्ल्यूटीओ ने प्रथम डब्ल्यूएचओ पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक शिखर सम्मेलन 2023 का गुजरात घोषणापत्र जारी कर दिया है। मंत्रालय के अनुसार डब्ल्यूटीओ का गुजरात घोषणापत्र वैश्विक प्रतिबद्धता और सभी के लिए स्वास्थ्य एवं कल्याण का लक्ष्य पाने के लिए पारंपरिक चिकित्सा क्षमता के उपयोग की पुष्टि करता है।

घोषणापत्र ने स्वदेशी ज्ञान, जैव विविधता और पारंपरिक, पूरक और एकीकृत चिकित्सा के प्रति वैश्विक प्रतिबद्धताओं की पुष्टि की है। डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के लिए समग्रता, संदर्भ-विशिष्ट, बेहतर समझ, आकलन और कठोर वैज्ञानिक तरीकों के प्रयोग की आवश्यकता है।

इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए केंद्रीय आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि गुजरात घोषणापत्र पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली के हमारे प्राचीन ज्ञान को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अघानाम घेब्रेयेस ने कहा कि गुजरात घोषणापत्र विज्ञान के माध्यम से पारंपरिक चिकित्सा की क्षमता का दोहन करने के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में काम करेगा और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों में पारंपरिक औषधियों के एकीकरण पर फोकस करेगा और पारंपरिक चिकित्सा की शक्ति प्रकट करने में मदद करेगा। 

पारंपरिक चिकित्सा पर पहला वैश्विक शिखर सम्मेलन विश्व स्वास्थ्य संगठन और आयुष मंत्रालय ने 17-18 अगस्त को गांधीनगर, गुजरात में आयोजित किया था।

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