टीम एबीएन, कोडरमा। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनायी जाती है। हर साल जन्माष्टमी का त्योहार दो दिन मनाया जाता है। एक दिन गृहस्थ जीवन वाले और दूसरे दिन वैष्णव संप्रदाय वाले सन्यासी जन्माष्टमी मनाते हैं।
गृहस्थ जीवन वाले 6 सितंबर (बुधवार)और वैष्णव संप्रदाय 7 सितंबर (गुरुवार) को जन्माष्टमी मनायेंगे। उक्त जानकारी मां तारा ज्योतिष संस्थान के आचार्य अनिल मिश्रा ने कही। उन्होने कहा कि 6 सितंबर (बुधवार) को भगवान श्री कृष्ण का 5250वां जन्मोत्सव मनाया जायेगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि को मथुरा में हुआ था। भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में यह त्योहार हर साल पूरे देश में पूर्ण हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
इस दिन भक्त पूरे नियम और संयम से भगवान की पूजा-अर्चना करते हैं। अनिल ने कहा कि हिंदू ग्रथों के अनुसार, कंस के बढ़ रहे अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान विष्णु ने जन्माष्टमी के दिन कृष्ण के रूप में आठवां अवतार लिया था।
वाराणसी पंचांग के अनुसार 6 सितंबर (बुधवार) को रात्रि 7:57 बजे से अष्टमी तिथि एवं दिन में 2:32 बजे से रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ हो रहा है। मध्य रात्रि व्यापानी अष्टमी तिथि ही कृष्ण जन्माष्टमी के लिए मान्य होती है न कि सूर्योदयी अष्टमी तिथि 7 सितंबर (गुरुवार) कृष्ण जन्माष्टमी के लिए प्रभावी नहीं है।
इस दिन मध्य रात्रि मे ना तो अष्टमी तिथि रहेगी और ना ही रोहिणी नक्षत्र। अतः 6 सितंबर (बुधवार) को ही अर्धरात्रि में अष्टमी तिथि रोहिणी नक्षत्र का संजोग एक साथ मिलने के कारण जयंती नामक योग में गृहस्थ लोग श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनायेंगे। इस दिन मध्य रात्रि के समय अष्टमी तिथि रोहिणी नक्षत्र के साथ बुध आदित्य योग के साथ, अमृत समान प्रबल योग बन रहा है।
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