एबीएन नॉलेज डेस्क। इसरो ने चांद पर चंद्रयान-3 के सफल लैंडिंग का ऐलान किया। चांद के साउथ पोल में जहां कोई देश नहीं पहुंच पाया था, वहां भारत पहली बार पहुंचा। विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर ने 23 अगस्त से ही अपना काम शुरू कर दिया और पिछले 10 दिनों में कई ऐसी खोज की हैं, जो दुनिया के लिए एक अचंभा है।
पूरी दुनिया इसरो की इस सफलता के आगे नतमस्तक हो गयी थी, नासा से लेकर दुनिया की अन्य बड़ी एजेंसियों ने करफड को सलाम ठोका था। भारत चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा, दक्षिणी पोल पर पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बना था।
इसरो एक ऐसा संस्थान है, जिस पर पूरी दुनिया निगाहें रखती हैं। मंगलयान, चंद्रयान और अब सूर्ययान की सफलताओं ने इसके कद को और भी बढ़ा कर दिया है। दुनिया की कई बड़ी एजेंसियां अपने बड़े मिशनों में अंतर रखती हैं, क्योंकि तैयारी के लिए वक्त चाहिए और बाकी भी चीजें देखनी होती हैं।
लेकिन इसरो ने सीमित संशाधनों के बाद कई ऐसे कीर्तिमान स्थापित किए हैं, जिसने इतिहास रचा है। 11 दिनों के भीतर ही एक लैंडिंग और एक लॉन्चिंग इसका पुख्ता सबूत भी देता है।
इन सफलताओं की वजह से ही आज दुनिया की कई बड़ी एजेंसियां और देश इसरो की मदद लेते हैं। भारत ने कई बार दूसरे देशों के सैटेलाइट अपनी तरफ से लॉन्च किये हैं, क्योंकि अन्य देशों के पास इतना अनुभव नहीं है इसलिए इसरो की मदद ली जाती है।
इसके अलावा कई देश अपने अहम मिशन में भी इसरो को साझेदार बनाते हैं, जिसका ताजा उदाहरण चंद्रयान-4 होने वाला है। चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के बाद जापान भारत के साथ मिलकर चंद्रयान-4 पर काम करने वाला है।
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