टीम एबीएन, रांची। बहुचर्चित चारा घोटाला मामले में डोरंडा कोषागार से अवैध निकासी (कांड संख्या आरसी 48एध्96 )को लेकर सीबीआइ की विशेष अदालत ने दोषियों की सजा पर फैसला सुना दिया है। शुक्रवार को कोर्ट ने 35 दोषियों को 4-4 साल की सजा और अधिकतम एक करोड़ राशि तक का जुर्माना भी लगाया है। यह सजा सीबीआई के विशेष न्यायाधीश विशाल श्रीवास्तव की अदालत ने दी है।
सबसे अधिक एक करोड़ का जुर्माना तत्कालीन जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ गौरी शंकर प्रसाद पर पर लगाया है। सभी दोषियों को उम्र और आरोप के हिसाब से जुर्माना लगाया गया है। इनमें सबसे कम जुमार्ना 75 हजार का लगाया गया है। डा गौरीशंकर प्रसाद के पुत्र आपूर्तिकर्ता शरद कुमार पर 40-40 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। जुर्माने की राशि नहीं देने पर नौ लोक सेवकों को डेढ़ साल एवं 26 आपूर्तिकर्ताओं को एक साल अतिरिक्त जेल काटनी होगी।
विशेष न्यायाधीश विशाल श्रीवास्तव की अदालत ने शुक्रवार को सजा के बिंदु पर सुनवाई के दौरान तीन अभियुक्त को छोड़ अन्य अभियुक्त व्यक्तिगत रूप से मौजूद थे। जो उपस्थित नहीं उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया गया था। सुनवाई के दौरान सीबीआइ के विशेष लोक अभियोजक रवि शंकर ने आरोप के अनुसार अधिकतम सजा की मांग की।
वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने स्वास्थ्य एवं उम्र को देखते हुए कम से कम सजा देने का अनुरोध किया। अदालत ने 35 अभियुक्तों को 28 अगस्त को दोषी पाकर बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा भेज दिया था।
अदालत ने नौ लोक सेवकों को भादवि की धाराओं के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में दोषी पाकर सजा सुनायी है। दोषी करार एक अभियुक्त सुरेश दुबे फरार है। गिरफ्तारी या सरेंडर के बाद सजा सुनायी जायेगी। उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है।
लोकसेवकों : पशुपालन पदाधिकारी डॉ गौरी शंकर प्रसाद को एक करोड़ का जुर्माना। बजट एवं लेखा पदाधिकारी नित्यानंद कुमार सिंह पशुपालन विभाग के क्षेत्रीय निदेशक डॉ जुनूल भेंगराज, सहायक निदेशक डॉ कृष्ण मोहन प्रसाद, क्षेत्रीय संयुक्त निदेशक डॉ राधा रमन सहाय को पांच-पांच लाख का जुर्माना। सुअर पालन विभाग के मैनेजर डॉ रवींद्र कुमार सिंह व विलेज आफिसर डॉ फणिंद्र कुमार त्रिपाठी को 75-75 हजार, कोषागार पदाधिकारी महेंद्र प्रसाद व देवेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव को तीन-तीन लाख जुर्माना लगाया गया है।
आपूर्तिकर्ता : शरद कुमार- 40.40 लाख, डॉ बिजयेश्वरी प्रसाद सिन्हा- 36.10 लाख, त्रिपुरारी मोहन प्रसाद - 30 लाख, दयानंद प्रसाद कश्यप - 30 लाख , मोहिंद्र सिंह बेदी - 25 लाख, डॉ अजित कुमार वर्मा- 24.50 लाख, राम नंदन सिंह- 16 लाख, सत्येंद्र कुमार मेहरा - 16 लाख, अजय कुमार सिन्हा - 13.05 लाख, सुशील कुमार सिन्हा - 12 लाख, उमेश दुबे- 11 लाख, रामा शंकर सिंह -10 लाख, अरुण कुमार वर्मा-10 लाख, रवि नंदन कुमार सिन्हा उर्फ रवि कुमार सिन्हा -10 लाख , राजेंद्र कुमार हरित - 10 लाख, प्रदीन वशिष्ठ उर्फ प्रदीप कुमार - 6 लाख, श्याम नंदन सिंह - 5.50 लाख, संजय कुमार- 5.20 लाख , अनिल कुमार - 5 लाख, मो सईद व मो तौहिद-5- 5 लाख, राजन मेहता. 5 लाख, अशोक कुमार यादव- 4.40 लाख, जगमोहन लाल कक्कड़ - 4.40 लाख, मदन मोहन पाठक- 4 लाख, प्रदीप कुमार चौधरी - 3.80 लाख।
इस मुकदमे में 617 गवाहों को पेश किया गया है, जबकि 50 हजार से ज्यादा एविडेंस और डॉक्यूमेंट पेश किये गये। 28 अगस्त को कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए 35 लोगों को बरी किया था। वहीं, 53 लोगों को 3 साल से कम की सजा सुनायी थी।
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