टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड विधानसभा के मॉनसून सत्र सत्र के अंतिम दिन समापन भाषण में कहा कि मणिपुर में आदिवासी समाज का उत्पीड़न हो रहा है और वहां की सरकार मूकदर्शक बन तमाशा देख रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन संरक्षण नियमावली में पिछले वर्ष ग्राम सभा के अधिकार को छीन लिया गया और फिर लोकसभा के चल रहे मॉनसून सत्र में वन संरक्षण कानून में केंद्र सरकार ने ऐसे संशोधन कर दिये हैं कि भविष्य में आदिवासियों से उनका जंगल ही छीन लिया जायेगा।
परंतु मैं न तो पिछले साल के संशोधित नियमावली को इस राज्य में लागू होने दिया और न ही अभी कानून में किए गए बदलाव से आदिवासियों को उनके जंगल से बेदखल करने की केंद्र सरकार के मनसूबे को सफल होने दूंगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बहुत जल्द राज्य सरकार विस्थापन आयोग, एससी एवं एसटी आयोग का भी गठन करने जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुखाड़ के मद में राज्य को केंद्र सरकार द्वारा 9000 करोड़ रुपये देना था, लेकिन केंद्र सरकार ने राज्य को मात्र 500 करोड़ों ही दिये।
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में 8 लाख वंचित पात्र लाभुकों के लिए पीएम आवास स्वीकृत करने का बार-बार मांग कर रहे हैं। परंतु केंद्र सरकार के कानों पर जूं नहीं रेंग रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब विधानसभा के द्वारा 1932 के खतियान वाली स्थानीयता और पिछड़ों को 27% आरक्षण वाले विधेयक को पारित कराकर हम लोग भेजते हैं तो उसको राज्यपाल के यहां लटका दिया जाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे पक्का यकीन है कि संविधान के आर्टिकल 200 के अंतर्गत राज्यपाल के द्वारा संदेश विधानसभा को नहीं भेजना इसी साजिश का हिस्सा है, जिससे कि हम लोग यह दोनों विधेयक फिर से विधानसभा से पारित करके राज्यपाल को नहीं भेज पायें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पेपर लीक न हो हम इसके लिए कानून लाये। गुजरात, उत्तराखंड जैसे राज्यों में जब इस प्रकार का कानून पहले से ही लागू है तो हम इसे छात्र हित में जब लागू कर रहे हैं, तो फिर यहां के विपक्ष को पेट में दर्द क्यों हो रहा है।
श्री सोरेन ने कहा कि हम हजारों पदों पर नियुक्ति कर चुके हैं, वहीं और 40 से 50 हजार पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ा चुके हैं। मैं इस बात की गारंटी देता हूं कि सिर्फ और सिर्फ झारखंडियों को ही रोजगार एवं स्वरोजगार दूंगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार अपराध पर पूर्ण नियंत्रण के लिए पूरी तरह से कटिबद्ध है। डीजीपी एवं पुलिस के बड़े अधिकारियों को हमने साफ कह रखा है कि अपराध पर किसी भी हालत में लगाम लगायें, इसमें आप को खुली छूट है एवं किसी का पैरवी भी आपको नहीं सुनना है।
सीएम ने कहा कि मणिपुर में हजारों घर जला दिये गये सैकड़ों लोगों की हत्या कर दी गयी है परंतु, सरकार नाम मात्र के लिए एफआईआर दर्ज की है वह भी माननीय सर्वोच्च न्यायालय से फटकार लगने के बाद। सोरेन ने कहा कि मैं बहुत ही दु:खी और मर्माहत हूं, युवा नेता सुभाष मुंडा की नृशंस हत्या कर दी गयी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके हत्यारों को पुलिस पकड़ चुकी है। इस घटना में शामिल किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जायेगा। परंतु कुछ राज्यों में ऐसा क्यों नहीं हो पा रहा है, मोनू मानेसर को हरियाणा पुलिस क्यों नहीं गिरफ्तार कर पा रही है।
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