मणिपुर : 35 शवों के साथ सड़कों पर हुजूम

 

  • मणिपुर में फिर क्यों भड़क गयी हिंसा, फोर्स से सीधे टकरायी जनता

एबीएन सेंट्रल डेस्क। मणिपुर में एक बार फिर माहौल तनावपूर्ण हुआ है और गुरुवार को चुराचांदपुर में 35 लोगों के शव को सामूहिक रूप से दफ्न करने की कोशिश के बीच हिंसा भड़क गयी। चुराचांदपुर और विष्णुपुर के बॉर्डर पर बीते दिन सुरक्षाबलों और लोगों के बीच हिंसा हुई, इस दौरान पत्थरबाजी हुई और आंसू गैस के गोले भी छोड़े गये। 

आखिर यह क्यों हुआ और हाईकोर्ट ने इस मामले में क्या दखल दिया, समझिये…

मणिपुर के संगठन इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम (आईटीएलएफ) ने कुकी-जोमी समुदाय के कुल 35 शवों को एक साथ दफनाने की बात की थी। इस संगठन ने चुराचांदपुर जिले के एस बोलजांग गांव के एक मैदान में शव दफनाने की बात कही गयी थी, लेकिन पुलिस की ओर से ऐसा न करने की अपील की गयी थी। 

गुरुवार सुबह से लोगों का इस मैदान में जाने का सिलसिला शुरू हुआ और हालात बिगड़ना भी शुरू हो गये। फोर्स ने लोगों को इस इलाके की ओर आने से रोका था, जिसके बाद भीड़ ने बड़ी संख्या में विरोध किया और पत्थरबाजी की। बाद में सुरक्षाबलों ने हवाई फायरिंग की और आंसू गैस के गोले भी छोड़े गये। इस नए बवाल ने राज्य में फिर से माहौल को गर्म कर दिया है।

केंद्र सरकार ने दिया आश्वासन

35 शव को दफनाने की खबर ने जब माहौल गर्म किया, तब मणिपुर हाईकोर्ट ने इस मामले में दखल दिया। हाईकोर्ट ने प्रस्तावित अंत्येष्टि स्थल पर यथास्थिति बनाने के निर्देश दिये थे। सिर्फ हाईकोर्ट ही नहीं बल्कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी हालात को काबू करने की कोशिश की।

गृह मंत्रालय की अपील के बाद ग्रुप ने सात दिन के लिए अंत्येष्टि के कार्यक्रम को आगे बढ़ा दिया। केंद्र ने आश्वासन दिया है कि 35 शवों को दफनाने की मांग पर जल्द ही फैसला लिया जायेगा। संगठन ने जब कुकी-जोमी समुदाय के 35 शवों को दफनाने की बात कही थी, तभी इसको लेकर चेतावनी दी गयी थी कि ऐसा होने से हिंसा भड़क सकती है। 

जब गुरुवार को यहां लोगों का पहुंचना शुरू हुआ, तभी पत्थरबाजी और पुलिस से हथियार लूट लिये गये थे। गौरतलब है कि मणिपुर में पिछले करीब तीन महीने से हिंसा हो रही है। मैतई और कुकी समुदाय के बीच जारी जातीय संघर्ष ने 3 मई को हिंसा का रूप ले लिया।

 3 मई को एक मार्च निकला, जिसके बाद हिंसा शुरू हो गयी थी और अबतक इस हिंसा में 160 से अधिक लोगों की मौत हो गयी। मणिपुर के मसले पर सड़क से लेकर संसद और कोर्ट तक बहस चल रही है।

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