टीम एबीएन, रांची। राक्षसी शक्तियां बड़ी तेजी से बढ़ती हैं। रक्तबीज महिषासुर, रावण जैसे पंथवादी जो स्वयं को भगवान कहते हैं ये मायावी भी होते हैं। अधर्म को धर्म बताते हैं। ये स्वयं के डीएनए में ही छेड़छाड़ करते हैं, जो छेड़छाड़ वैज्ञानिक पशुओं में भी नहीं करना चाहते हैं। यही विनाश का कारण बहुल संख्या वाले जीवों का होता है।
मछलियां, टिड्डे अपनी सामूहिक आत्महत्या कर लेते या महाभारत और कर्बला की तरह उत्पात के शिकार स्वयं हो जाते हैं। तेजी से बढ़ने वाले पौधे, लता और मजहबी विचारों की आयु कम होती है। शेर, हाथी की संख्या कम है, पर भेड़ बकरियों की संख्या सर्वाधिक है। इसलिए सनातनी भीड़ को देखकर न लालायित होइये, न हताश और न डरिये।
अधर्मी रावण की तरह अत्यधिक रथ और हथियार से पूर्ण हो, तो भी राम जमीन से युद्ध लड़कर रावण को और पांडव कौरवों को भारतीय फिरंगियों को धूल धुसरित कर देते हैं। इसलिए सत्य और शाश्वत धर्म सनातन है और शेष धर्म खतरे में है। यही धर्म विचारधारा ब्रह्मांड के समाप्ति काल तक रहेगा।
सनातन के राजा ययाति और विश्वामित्र के वंशज दुनिया में फैल गये। इसलिए सारी दुनिया में ब्राह्मण का डीएनए मिलता है। यही यहुदी धर्म बनायें, सारी दुनिया में यहुदी फैल गये पर आज सिर्फ इजरायल में है। फिर बौद्ध आया। दर्जनों राष्ट्र में फैल गया। पर आज कोई बौद्ध राष्ट्र नहीं है।
विश्व में ईसाइयत की लालटेन नहीं बूझती थी। पर 56 देश में इस्लाम फैल गया। इसाई सिमट गये। इस्लाम शासित तीन चौथाई देश भुखमरी-गृहयुद्ध के शिकार हैं और शास्वत सनातन धर्म की संस्कृत कंप्यूटर के छठे जनरेशन की भाषा बन गयी है। दर्जनों राष्ट्र में हिन्दूत्व बढ़ रहा है।
उक्त बातें राजधानी रांची के प्रख्यात कथा वाचक पं रामदेव पाण्डेय ने बरियातू हाउसिंग में आयोजित कथा के दौरान कही। वह पिछले 26 जुलाई से लगातार कथा कर रहे हैं। बताते चलें कि कल से 12 अगस्त तक श्री शिवपुराण की कथा होगी।
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