गुमला। गुमला झारखंड की राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय संस्था बदलाव मंच ग्लोबल फाउंडर सह अध्यक्ष दीपक क्रांति की मंच पर रविवार रात्रि गूगल मीट के माध्यम से संविधान विषय पर राष्ट्रीय काव्य सम्मेलन सह विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत मां शारदे की वंदना से हुई, जिसे रूपा व्यास ने प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि साहित्य के उत्थान के लिए बदलाव का भी विशिष्ट संविधान है। 26/11 की दर्दनाक घटना के कारण उस दिन कार्यक्रम नहीं किया गया। मौके पर विशिष्ट अतिथि गौतम गाजीपुरी और कार्यक्रम अध्यक्ष दीपक क्रांति ने संविधान विषय पर क्रांतिकारी विचार प्रस्तुत किए। संविधान दिवस एक दिवस का मोहताज नहीं ब्लकि देशवासियों के हर दिन संवैधानिक होना चाहिए... उन्होंने अपने क्रांतिकारी अंदाज में कहा कि जब ईमानदार बेईमान हो जाता है, तब भ्रष्ट हिंदुस्तान हो जाता है। कानून के जानकार करते हैं कानून तार-तार और बदनाम संविधान हो जाता है। इस अवसर पर साक्षी, नई दिल्ली, निर्मल जैन नीर ऋषभदेव राजस्थान, नगेंद्र बाला बारेठ, दिल्ली, सुशीला कुमारी इटखोरी, चतरा (झारखंड), राजेश तिवारी मक्खन झांसी उप्र, प्रो डॉ दिवाकर दिनेश गौड़ गोधरा गुजरात, मिथिलेश कुमार सिंह वाराणसी, डॉ जयप्रकाश नागला नांदेड़, महाराष्ट्र जुगल किशोर पुरोहित बीकानेर राजस्थान, डॉ दीप्ति गौड़ दीप कवयित्री ग्वालियर मध्यप्रदेश आदि ने संविधान विषय पर अपनी अपनी शानदार प्रस्तुति दी।
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