सर्वोत्तम शिष्य : स्वामी सत्यानंद सरस्वती

 

एबीएन सोशल डेस्क। ग्यारह साल पहले एक कुत्ता मेरे पास आया, जो आज मेरे मन में, मेरे स्मृति में एक मात्र शिष्य के रूप में आता है। वह शिष्यत्व का प्रतीक था, जैसा हर शिष्य को होना चाहिए। उसे दिन-रात, एक घंटे के साठ मिनट, हर मिनट के साठ सेकंड, सदैव मेरा ख्याल रहता था। जब मैं शौचालय में जाता तो वह वहां भी मेरे साथ जाता। 

रात में जब मैं सोने जाता तो वह बीच-बीच में सूंघकर यह निश्चित कर लेता कि मैं ठीक-ठाक हूं या नहीं। वह कभी मुझे अकेले नहीं छोड़ता था, वह मुझ से अलग रहना ही नहीं चाहता था। शिष्य या भक्त को हर क्षण अपने गुरु या इष्ट का इसी प्रकार ध्यान करना चाहिए।

मैंने भी उसकी बड़ी सेवा की। मैंने उसके लिए आश्रम के सारे नियमों को तोड़ डाला। वह तो शाकाहारी था नहीं। अगर उसे रोटी या सब्जी दी तो वह उसे सूंघता भी नहीं था। वह मांस, पनीर, दूध, मक्खन पसंद करता था। मैंने अपने लिए तो कभी भोजन नहीं पकाया, परन्तु उसका भोजन मैं पकाता था। वह मुझे अपना भोजन पकाते देखता तो मेरे पैर चाटकर मानो कहता, स्वामीजी, धन्यवाद...!

भोले को अपना भोजन चट कर जाने में केवल दो से ढाई मिनट लगता था। खाते समय उसकी एक आंख भोजन पर और दूसरी आंख मेरे पर रहती थी। मुझे उसके पास खड़ा रहना पड़ता था, क्योंकि अगर मैं हट जाता तो वह भी खाना छोड़कर मेरे साथ चल देता! ऐसे ही किसी भी भक्त की भक्ति ईश्वर के प्रति होनी चाहिए, ऐसी ही लगन एक शिष्य की अपने गुरु के प्रति होना चाहिए।

तुलसीदासजी ने रामचरितमानस में कहा है न-

कामिहि नारि पिआरि जिमि, लोभिहि प्रीय जिमि दाम।
तिमि रघुनाथ निरंतर प्रीय लागहु मोहि राम।

पैसे वालों को जैसे पैसे का ख्याल रहता है, छोकरे को छोकरी का ख्याल रहता है और उदार व्यक्ति को देने का ख्याल रहता है, वैसे ही ईश्वर का ख्याल बना रहना चाहिए।

कबीरदास तो और भी बढ़िया बात कहते हैं-

ऐसा जाप जपो मन लाई, सो२हं सो२हं सुरता गाई।

छह सौ सहस इक्कीसौ जाप, अनहत उपजै आपै आप।

तुम्हें अपनी चेतना के प्रति सतत् सजग रहना चाहिए, हर पल, हर क्षण उसे याद रखना चाहिए, प्रत्येक आती-जाती श्वास के साथ तुम्हें सदैव सो२हं, सो२हं, सो२हं ही सुनना चाहिए। लेकिन इक्कीस हजार छह सौ जाप करें कैसे? आदमी सामान्य रूप से एक मिनिट में पन्द्रह बार श्वास-प्रश्वास लेता है। एक घण्टे में हुआ नौ सौ, चौबीस घण्टे में हुआ इक्कीस हजार छ: सौ। 

इसका मतलब यह हुआ कि चौबीस धण्टे में हर श्वास में तुम सो२हं सो२हं सो२हं का ख्याल रखो। करो तो? यह तभी हो सकता है जब पेशाब रुक जाये, टट्टी रुक जाये, भूख रुक जाये, नींद रुक जाये, विक्षेप रुक जाये, तभी तुम इक्कीस हजार छह सौ सोलह जाप 24 घंटे में कर सकते हो।

यह केवल भोले के लिए संभव था। 24 घण्टे मेरा ख्याल रहता था। हमें तो आश्चर्य होता था भगवान, यह कुत्ता है। यह तो शिष्यत्व का सबसे बड़ा उदाहरण है। एक क्षण के लिए भी वह मुझे नहीं छोड़ता था। हमेशा मेरी तरफ देखता रहता था। कभी मेरी तरफ पीठ करके नहीं बैठा।मैं उसकी पीठ तरफ चला जाता तो वह तुरंत धूम जाता था। बस, शिष्य का गुरु के साथ, भक्त का भगवान के साथ यही रिश्ता होना चाहिए। (भक्ति योग सागर-भाग 7 से उद्धृत)

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।

© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse