टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 16 जुलाई 2023 को नागपुरी भाषा परिषद एवं नागपुरी साहित्य संस्कृति मंच ने लखन सिंह यादव महाविद्यालय में नागपुरी भाषा का मानकीकरण विषय पर सेमिनार आयोजित की गयी। मौके पर कॉलेज के विद्यार्थियों ने डॉ शकुंतला मिश्र को विशेष रूप से सम्मानित भी किया।
सेमिनार में कई शिक्षक, प्राध्यापक, साहित्यकार एवं छात्र उपस्थित थे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्मश्री मधु मंसूरी हंसमुख थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ प्रसाद ने की। विषय प्रवेश कराते हुए नागपुरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ उमेश नंद तिवारी ने कहा कि जब तक किसी भाषा का मानकीकरण नहीं हो जाता है, तब तक उस भाषा में कई विसंगतियां आती रहती हैं।
नागपुरी को नागवंशियों ने 2000 वर्षों तक राजभाषा के रूप में अपनाया। इसके बावजूद यह भाषा उपेक्षित है। अत: मानकीकरण की आज नितांत आवश्यकता है। आज नागपुरी के ध्वनि पर विचार विमर्श किया गया एवं नागपुरी के स्वरों की संख्या 8 बतायी गयी तथा व्यंजनों की संख्या 30 पर सबकी सहमति बनी। इस संबंध में साहित्यकारों एवं शिक्षकों तथा प्रबुद्ध वर्ग का विचार आमंत्रित किया गया है।
मुख्य अतिथि पद्मश्री मधु मंसूरी हंसमुख ने नागपुरी भाषा की स्थिति दयनीय बताते हुए कहा कि सरकार की ओर से जनसंख्या अधिसूचना में इसे नागपुरी और सादरी के रूप में दो भागों में विभक्त कर दिया गया है, जो चिंतनीय है। इसमें सुधार की नितांत आवश्यकता है। अन्यथा नागपुरी भाषा का अस्तित्व ही मिट जायेगा।
डॉ खालिक अहमद ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि जब तक विद्यालय, महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के लिए पद सृजित नहीं किया जाएगा तब तक छात्रों के बीच में अपनी मात्रृभाषा पढ़ने के लिए रुझान पैदा नहीं हो सकती है। डॉ शकुंतला मिश्र ने क्षेत्रीय भाषाओं को प्राथमिक स्तर से नहीं लागू पर चिंता व्यक्त किया।
अपने अध्यक्षीय भाषण में राम प्रसाद ने कहा कि किसी भी भाषा के लिए लिखित रूप एक होना चाहिए, भले ही इसका बोली रूप भिन्न हो सकता है। इस अवसर पर नागपुरी भाषा के मानकीकरण हेतु कमेटी भी गठित की गई जिसके अध्यक्ष के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार श्री धनेंद्र प्रवाही का चुनाव किया गया तथा सदस्य संयोजक के रूप में डॉ शकुंतला मिश्र को चुना गया।
इस कमेटी में 27 सदस्यों का चुनाव किया गया जिसमें विभिन्न क्षेत्र के लोगों को शामिल किया गया है। तय किया गया कि प्रत्येक महीने के तीसरे रविवार को बैठक की जाएगी तथा मानकीकरण के विषय में विचार विमर्श करने के साथ-साथ नागपुरी भाषा के विकास के लिए भी प्रयास किये जायेंगे।
भाषा को यथेष्ट स्थान दिलाने के लिए भी आवश्यकता पड़ने पर मंत्री, विधायक तथा मुख्यमंत्री महोदय से भी संपर्क किया जाएगा और अपनी मांग रखी जायेगी।
मौके पर लाल राजेंद्र सिंह, मनोहर मोहांती, हरिनंदन महली, रामदेव बड़ाईक, डॉ सुखदेव साहू, डॉ रामकुमार, युगेश महतो, योगेश प्रजापति, डॉ अंजूलता कुमारी, प्रमोद कुमार राय, आशा कुमारी, रविंद्र ओहदार, करमी मांझी, पप्पू कुमार महतो आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ शकुंतला मिश्र ने किया।
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