एबीएन सेंट्रल डेस्क। बंगाल की खाड़ी में बनने वाले सिस्टम में लगातार कमी आ रही है, इससे झारखंड में प्री मानसून गतिविधियां बदल रहीं हैं। इसका नतीजा है कि राज्य में प्री-मानसून वाली बारिश में कमी आयी है।
मौसम विभाग (रांची) के मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि प्री मानसून में बारिश कम हो रही है, तापमान बढ़ रहा है। जलवायु परिवर्तन के कारण ही मौसम भी बदल रहा है और ऋतुओं के प्रभाव पर भी बदलाव आ रहा है।
बंगाल की खाड़ी में मार्च से मई तक अमूमन 3 से 4 सिस्टम बनते हैं, लेकिन 2022 को छोड़ बीते 10 वर्षों में एक बार भी 2 से अधिक सिस्टम नहीं बना है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, सिस्टम में गड़बड़ी का असर इस साल भी दिख रहा है। इस बार सिर्फ एक सिस्टम बना है। विशेषज्ञों का मानना है कि वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का प्रभाव बढ़ा है। इस वजह से भी प्री-मानसून की गतिविधियों में बदलाव आया है।
बंगाल की खाड़ी में सिस्टम की कमी का असर
मौसम वैज्ञानियों की मानें तो बंगाल की खाड़ी में बनने वाले सिस्टम की कमी का असर बिहार, यूपी, छतीसगढ़ और मध्य प्रदेश के कुछ भाग भी पड़ा है। यहां भी मानसून से पहले होने वाली बारिश घटी है। रांची मौसम विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के अनुसार यह असर खाड़ी में तूफान के स्वरूप पर निर्भर करता है।
खाड़ी के दक्षिणी हिस्से में बने सिस्टम का देश के दक्षिणी हिस्सों पर पड़ता है। झारखंड पर इसका आंशिक असर पड़ता है और हल्की बारिश होती है। बंगाल की खाड़ी में बनने वाले चक्रवातीय तूफान यदि उड़ीसा और बंगाल के तटवर्ती इलाकों से टकराते हैं तो इसके प्रभाव से झारखंड समेत बिहार, छग, मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से व यूपी के पूवार्चंल तक बारिश होती है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार खाड़ी में बने पिछले पांच सिस्टम में से एक का भी प्रभाव झारखंड पर नहीं पड़ा। इसका ताजा उदाहरण तीन दिन पहले मोचा तूफान है, जो झारखंड के संपर्क में आया ही नहीं। 2022 में चार सिस्टम बने, इसमें तीन का असर नहीं पड़ा। जबकि एक संताल तक सीमित रहा।
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