टीम एबीएन, रांची। झारखंड प्रदेश संयुक्त शिक्षक मोर्चा के संयोजक विजय बहादुर सिंह, अमीन अहमद और प्रवक्ता अरुण कुमार दास ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि राज्य के शिक्षकों को गृह जिला अथवा अन्तर जिला स्थानांतरण की सुविधा पूर्व के स्थापित नियमों के आधार पर शिक्षा एवं शिक्षकहित में किया जाना चाहिए।
वर्तमान शिक्षक स्थानांतरण नियमावली 2022 में पूर्व की भांति शिक्षकों के पूरे सेवा काल में एक बार गृह जिला अथवा अन्तरजिला के साथ-साथ अंतर्राज्यीय स्थानांतरण की सुविधाएं को समाप्त कर दिया गया है, जिसके कारण अनेक शिक्षकों को विभिन्न असुविधाओं का सामना करना पड रहा है, फलस्वरुप इसका प्रतिकूल प्रभाव शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है।
शिक्षाविदों एवं अनुभवी अधिकारियों के द्वारा शिक्षकों को गृह जिला एवं गृह प्रखंड स्थित विद्यालयों में पदस्थापित करने की प्राथमिकता को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए आवश्यक माना गया था, परन्तु इस ओर ध्यान दिए बिना वर्तमान स्थानान्तरण नियमावली में साजिश पूर्वक उक्त सुविधा को हटा दिया गया है जिससे राज्य के शिक्षक हतोत्साहित हैं।
मोर्चा के संयोजक अमीन अहमद ने कहा कि शिक्षा के प्रति दूरगामी सोच रखने वाले दिवंगत शिक्षा मंत्री स्व जगरनाथ महतो जी ने इस सम्बंध में दिनांक 5 सितंबर 2020 को सचिव, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, झारखंड सरकार को शिक्षक स्थानांतरण नियमावली 2022 में संशोधन का प्रस्ताव उपस्थापित करने का आदेश दिये थे, परंतु दुर्भाग्यवश उक्त आदेश को आज तक पदाधिकारियों के द्वारा नजरअंदाज कर ठंढे बस्ते में डाल दिया गया है।
उक्त संबंध में मोर्चा के प्रदेश प्रवक्ता अरुण कुमार दास ने जानकारी देते हुए कहा कि झारखंड प्रदेश संयुक्त शिक्षक मोर्चा सहित राज्य के तमाम शिक्षक संगठनों के द्वारा स्थानांतरण नियमावली 2022 के निर्माण काल से विभाग के समक्ष वार्ता एवं ज्ञापन के माध्यम से अनेकों बार निवेदन किया जाता रहा है।
विडंबना यह है कि जब विभाग के मुखिया के आदेशों को ही नजरअंदाज कर दिया जा रहा हो, तो फिर राज्य के आम जनमानस के समक्ष विभाग की विश्वसनीयता कैसे सिद्ध हो सकती है। यह विभाग के साथ-साथ राज्य सरकार के समक्ष भी एक यक्ष प्रश्न के रूप में प्रकट होती है।
झारखंड प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति नियमावली 2012 के अनुरूप शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया हेतु सभी जिलों को एकसाथ एक ही तिथि में काउंसलिंग कराये जाने के प्रावधान के विपरित जिला स्तर पर अलग अलग तिथियों में सुविधानुसार काउंसलिंग की तिथि आयोजित किया गया।
उक्त काउंसलिंग हेतु चयनित शिक्षक अभ्यार्थियों के द्वारा उपस्थापित किए गए मूल प्रमाण पत्र को कार्यालय में अंतिम नियुक्ति पत्र निर्गत होने तक जमा कर लिया गया, फल स्वरूप सबसे पहले काउंसलिंग आयोजित किए जाने वाले जिलों में अधिकांश शिक्षक अभ्यर्थी उपस्थित हुए।
उक्त काउंसलिंग में अधिकांश शिक्षक का अंतिम चयन भिन्न-भिन्न जिलों एवं भिन्न-भिन्न भाषा-भाषी क्षेत्र से मेधा सूची के अनुरूप हुए। परिणामस्वरुप बच्चों एवं शिक्षकों के बीच भाषाई भिन्नता की स्थिति उत्पन्न हो गयी, जिसका प्रत्यक्ष प्रभाव राज्य के गरीब बच्चों एवं उनके अभिभावकों के साथ शिक्षकों पर पड़ी, जो बच्चों के मातृभाषा में शिक्षा के मौलिक नियमों के विरुद्ध है और इसका सीधा प्रभाव राज्य के मानव सम्पदा पर पड रहा है।
झारखंड प्रदेश संयुक्त शिक्षक मोर्चा के संयोजक मंडली सदस्यों में शामिल विजय बहादुर सिंह, अमीन अहमद, मंगलेश्वर उरांव, डॉ सुधांशु कुमार सिंह एवं अरुण कुमार दास नें मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित संज्ञान में लेते हुए माननीय मुख्यमंत्री से मांग करती है कि दिवंगत शिक्षा मंत्री स्व जगरनाथ महतो के दूरगामी सोच एवं सकारात्मक पहल की प्रतिबद्धता को राज्य के शिक्षा एवं शिक्षक हित में पूर्ण कराने हेतु विभाग को आवश्यक दिशा निर्देश देते हुए शिक्षक स्थानांतरण नियमावली 2022 में सभी जरूरतमंद शिक्षकों को पूरे सेवाकाल में मात्र एक बार गृह जिला अथवा अंतर जिला स्थानांतरण की सुविधा बहाल करने के लिए आवश्यक संशोधन का मार्ग प्रशस्त किया जाय।
ताकि दिवंगत हो चुके राज्य के अतुलनीय शिक्षा मंत्री जी को सही मायने में सच्ची श्रद्धांजलि अर्पण करते हुए शिक्षा एवं शिक्षकों को न्याय मिल सके, अन्यथा राज्य के शिक्षक गण उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर हो जायेंगे। उक्त जानकारी झारखंड प्रदेश संयुक्त शिक्षक मोर्चा के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी अरुण कुमार दास ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
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