टीम एबीएन, कर्रा। लोधमा में ईद की नमाज अदा करने के बाद धूमधाम से एक दूसरे से गले मिलकर बधाई देते पंचायत प्रतिनिधि रशीद खान। माना जाता है कि ईद अल फित्र शव्वाल के महीने की दस तारीख को मनाई जाती है शव्वाल इस्लामिक कैलेंडर का दसवां महीना होता है, इसे रोजा तोड़ने की ईद भी कहा जाता है। जब मुस्लिम समुदाय के लोग ईद की नमाज पढ़ने के लिए निकलते हैं, तो कुछ मीठा चीज खाकर निकलते हैं।
माना जाता है कि हजरत मुहम्मद साहब ईद की नमाज पर जाने से पहले खजूर खाते थे। यही कारण है कि अक्सर परिवारों में इस दिन कुछ मीठा चीज खाकर ईद की नमाज के लिए निकलते हैं और लोग परिवार मित्रों के साथ मस्जिद या ईदगाह में जाकर ईद की सामूहिक नमाज अदा करते हैं।
नमाज अदा करने के बाद रिश्तेदारों दोस्तों पड़ोसियों से मिलते हैं और उन्हें अपने यहां भोजन पर आमंत्रित करते हैं। या उनके यहां जाते हैं। ईद का यह स्वरूप सामाजिक एकजुटता के महत्व पर जोर देता हैं।
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