एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका में बाजार खुलते ही बैंकों में हाहाकार मच गया है और दर्जनों क्षेत्रीय बैंका का कामकाज बंद कर दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, आज सुबह से ही दर्जनों क्षेत्रीय बैंकों में व्यापार को अस्थाई तौर पर रोक दिया गया है, क्योंकि बाजार खुलते ही बैंकों के शेयर्स औंधेमुंह गिरने लगे।
बाजार खुलने के बाद शेयरों में 75 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज करने के बाद दर्जनों बैंकों के कामकाज को बंद कर दिया गया है और माना जा रहा है, कि अमेरिका का बैंकिंग सेक्टर बहुत बड़े तूफान की तरफ बढ़ रहा है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। भारतीय शेयर बाजार पर भी इसका निगेटिव असर पड़ा है।
डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के दर्जनों बैंक बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं और शेयर बाजार के मुताबिक, वेल्स फार्गो में 7.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, बैंक आफ अमेरिका में 7.4 प्रतिशत की गिरावट, सिटीग्रुप की 5.8 प्रतिशत और जेपी मॉर्गन की 2.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
वहीं, अमेरिका के कई प्रमुख नेशनल बैंकों के शेयर भी गिरे हैं। वहीं, रीजनल बैंक वेस्टर्न एलायंस ने वॉल स्ट्रीट पर ओपनिंग बेल बजते ही अपने शेयर की कीमत में भारी गिरावट देखी है, जबकि फर्स्ट रिपब्लिक के शेयरों में 67 प्रतिशत और पैकवेस्ट में 35 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है। बाजार को बड़े पैमाने पर अस्थिरता से बचाने के लिए ट्रेडिंग सर्किट ब्रेकर तेजी से लागू किए गए हैं।
वहीं, बैंकिंग संकट के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने व्हाइट हाउस में रूजवेल्ट रूम से देश को संबोधित किया है और उन्होंने कहा है, कि सिलिकॉन वैली बैंक के पतन के बाद देश की वित्तीय प्रणाली को व्यापक तबाही से बचाने की तेज कोशिश की जा रही है।
बाजार खुलने से कुछ मिनट पहले उन्होंने कहा था कि अमेरिका के नागरिक विश्वास कर सकते हैं कि देश का बैंकिंग प्रणाली सुरक्षित है। राष्ट्रपति जो बाइडेन के अलावा रविवार को अमेरिकी अधिकारियों द्वारा सिलिकॉन वैली बैंक के बंद होने के बाद ग्राहकों को उनके निवेश की गारंटी देने के बावजूद बैंकिंग सेक्टर में तेज गिरावट दर्ज की जा रही है।
बाइडेन के साथ साथ अमेरिकी अधिकारियों ने गारंटी ली है कि लोगों का पैसा सुरक्षित रहेगा। लेकिन, आज बाजार खुलने के बाद इसका असर नहीं दिखा है। वहीं, माना जा रहा है, कि अमेरिकी बैंकिंग इतिहास में दूसरा सबसे बड़ा पतन शुरू हो चुका है, और 2008 के बाद बैंकिंग सेक्टर पर सबसे बड़ा संकट मंडरा रहा है।
पिछले एक हफ्ते में अमेरिका में दो बैंकों पर ताले लग चुके हैं और अब कई बैंकों के शेयर्स में तबाही मच गयी है। लिहाजा आशंका है कि कई और बैंक बंद होने की तरफ आगे बढ़ सकते हैं। वहीं, अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने एक नए बैंक टर्म फंडिंग प्रोग्राम की भी घोषणा की है, जो ट्रेजरी जैसे प्रीमियम कोलेट्रल के बदले में बैंकों को एक वर्ष तक के लिए ऋण प्रदान करेगा।
अमेरिका में बैंकिंग सेक्टर में हाहाकार मचने के पीछे की सबसे बड़ी वजह फेडरल रिजर्व का लगातार ब्याज दरों में इजाफा करना शामिल है। महंगाई को कंट्रोल करने के लिए अमेरिका की केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने पिछले साल से अब तक लगातार ब्याज दरों को बढ़ाया है जिसका भार बैंकिंग सेक्टर सह नहीं पा रहा है।
1980 के बाद से ये पहली बार है, जब फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में इस तरह का इजाफा किया है। लिहाजा बैंकिंग सेक्टर की चिंताजनक स्थिति बन गयी है। वहीं, राष्ट्रपति बाइडेन ने चार मिनट से भी कम समय के अपने भाषण में वित्तीय मंदी के प्रति अपनी प्रतिक्रिया का बचाव किया है और कहा कि सिलिकॉन वैली बैंक (एसवीबी) के मालिकों को निकाल दिया जाना चाहिए।
इसके साथ ही बाइडेन ने मौजूदा बैंकिंग समस्या के लिए पूर्ववर्ती ट्रंप शासन को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि अगर बैंक का एफडीसीआइ द्वारा अधिग्रहण कर लिया जाता है, तो बैंक चलाने वाले लोगों को वहां काम नहीं करना चाहिए। बाइडेन ने सिलिकॉन वैली बैंक बंद होने के पीछे के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।
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