टीम एबीएन, कोडरमा। सहारा समूह में जनता की बड़ी आबादी के भुक्तभोगी निवेशकों, एजेंटों व कर्मचारियों का अरबों-खरबों बकाया भुगतान की मांग व सहारा प्रमुख सुब्रत राय पर कार्रवाई की मांग को लेकर संयुक्त आल इंडिया जन आंदोलन संघर्ष न्याय मोर्चा के बैनर तले सहारा समूह के एजेंटों व कर्मचारियों ने जिला समाहरणालय पर एकदिवसीय धरना सह भूख हड़ताल किया।
धरना स्थल पर संघर्ष न्याय मोर्चा के जिलाध्यक्ष भागीरथ सिंह की अध्यक्षता में एक सभा का आयोजन किया गया। संचालन जिला उपाध्यक्ष संतोष गोप ने किया। सीटू के राज्य सचिव संजय पासवान ने सहारा कर्मियों के मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि सहारा इंडिया की इस चिट फंड कंपनी का करीब 25 हजार करोड़ रुपए सेबी-सहारा खाते में फंसा है। लेकिन निवेशकों का पैसा न तो सेबी और न ही सहारा भुगतान कर रहा है।
सहारा की योजनाओं में लाखों लोगों ने जमकर पैसा लगाया था, लेकिन कई साल बीत जाने के बाद भी उन्हें अपनी रकम नहीं मिला। जिसके कारण उनके बच्चों की पढ़ाई रूक चुकी है। बेटियों की शादी नहीं कर पा रहे हैं। ठेला, खोमचा वाले से लेकर, छोटे दुकानदार, पान की गुमटी लगाने वाले, शब्जी बेचने वाले, टेम्पो चालक सहित लाखों रोज कमाने खाने वाले ने पैसा दोगुना तीगुना जमा होने के लालच में अपनी रोज की कमाई का एक हिस्सा एजेंटों के माध्यम से सहारा इंडिया में जमा किया था, लेकिन मैच्योरिटी पूरा होने के बावजूद निवेशकों को पैसा नहीं लौटाया जा रहा है।
उनका जीवन भर की पूंजी फंस जाने से उनकी आर्थिक स्थिति डांवाडोल हो गई है। कई लोग महाजन की डर से बाजार में दुकान नहीं लगा रहे हैं, सुदखोर के चक्कर में फंस कर रोज की कमाई सूदखोरों की ही देना पड़ रहा है। भाजपानीत मोदी सरकार हमेशा इन बड़े पूंजीपतियों के पक्ष में खड़ा रही, यही कारण है कि नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और विजय माल्या जैसे कारोबारी देश की एक दर्जन से ज्यादा बैंकों का हजारों करोड़ रुपये का कर्ज लेकर विदेश भाग गए।
अडानी स्कैम पर सरकार चुप है। करोड़ों लोगों का पैसा डकारने वाले सुब्रत राय को भी मोदी सरकार संरक्षण दे रही है, जिसके कारण निवेशकों का पैसा वापस नहीं हो रहा है और सुब्रत राय ऐशो आराम की जिन्दगी जी रहा है।
मोर्चा के जिलाध्यक्ष भागीरथ सिंह ने कहा कि वर्ष 1978 में मात्र दो हजार की पूंजी से दो लाख करोड़ रुपये का मालिक देश की 70 प्रतिशत गरीब जनता के पैसे से बन गया सुब्रत राय। देश में 12 लाख लोगों का रोजगार खत्म हो गया और सड़क पर आ गया। कोडरमा जिला में लगभग साढ़े तीन लाख लोगों का करीब 500 करोड़ रुपये फंसा है। एजेंट मार खा रहे हैं, आत्महत्या करने को मजबूर हैं, लेकिन हम जनता का पैसा वापस लाने के लिए बड़ी लड़ाई के लिए तैयार हैं।
सभा को नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष राजेश सिंह, पूर्व मुखिया बसंती देवी, सुरेंद्र भारती आदि ने भी संबोधित किया। बाद में सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मांगों से संबंधित ज्ञापन उपायुक्त आदित्य रंजन को सौंपा। कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष भागीरथ सिहं, उपाध्यक्ष सचिंद्र शर्मा, संतोष गोप, मो अजीज, सुभाष सिहं, प्रभा देवी, अनुराधा देवी, चींता सिंह, पुनम देवी, संजय कुमार, सरिता सिन्हा, इंदु गुप्ता, कृष्णा वर्मा, मो रउफ अंसारी, संजय सिन्हा, तारकेश्वर राणा, प्रकाश यादव, सुरेश प्रसाद गुप्ता, आफताब आलम सहित दर्जनों लोग मौजूद थे।
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