एबीएन सेंट्रल डेस्क। किसानों की इन दिनों हरी पत्तेदार और मिर्च-टमाटर जैसी सब्जियों की पैदावार से मोहभंग होने के साथ ही उन्हें अब महंगी और विदेशी सब्जियों की खेती रास आने लगी है। इन सब्जियों से किसान हजारों रुपए की कमाई आसानी से करने लगे हैं। बड़े-बड़े नगरों एवं महानगरों में इन सब्जियों की मांग बढ़ चुकी है, जिनमें गुच्छी, चेरी टमाटर, जुकीनी, पर्सले, बोक चाय और शतावरी जैसे औषधीय पौधे भी हैं, जिन्हें इन दिनों बाहर से आयात किया जा रहा है। देश के बाजारों में ये सब्जियां 12 सौ से 15 सौ रुपये प्रति किलो बिकने लगी है।
चेरी टमाटर की किस्म साधारण टमाटर से कुछ अलग है। पास्ता से लेकर सलाद और कई प्रकार के व्यंजनों में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। छोटी साइज होने के बावजूद चेरी टमाटर 250 से 300 रुपए किग्रा बिक रहा है। इसकी उपज महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों के किसान लेने लगे हैं। पर्सले-विदेशी धनिया के नाम से मशहूर हो रहे अजमोद हरी पत्तेदार सब्जी है। इसका स्वाद धनिया से काफी अलग है और सलाद के रूप में बड़े होटलों में इसका उपयोग किया जा रहा है। बाजार में ये पत्तेदार सब्जी सौ रुपए प्रति किलो बिक रही है।
गुच्छी जंगली मशरूम है। इसकी किस्म हिमालय की तलहटी में तैयार की गई। चमत्कारी औषधीय गुणों के कारण देश के हर हिस्से में इसकी मांग बढ़ चुकी है। पहले यह मशरूम प्राकृतिक रूप से उगता था, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इसे नई तकनीक ईजाद कर किसानों को इसके लिए प्रशिक्षित कर दिया है। इसकी कीमत लाखों में है और किसान नई तकनीक के दम पर इसकी खेती कर अच्छा-खासा मुनाफा कमाने लगे हैं।
जुकीनी कद्दू वर्गीय सब्जी है। इसका आकार खीरा या तोरई की तरह है। इसका उपयोग वजन घटाने में कारगर साबित हुआ है। बड़े नगरों- महानगरों में जिम जाने व फिटनेस की चिंता रखने वालों की यह पहली पसंद बन चुकी है। बाजार में 150 से 200 रुपये प्रति किलो के भाव से ये बिक रहा है और इसकी डिमांड दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।
बोकचाय फाइव स्टार होटल की डिमांड बन चुकी है। यह पत्तेदार सब्जी है और इसे उगाना बहुत आसान है। इसके एक तने की कीमत 115 रुपये के लगभग किसानों को मिल रही है। इसकी खेती भी किसानों के लिए वरदान साबित होने लगी।
शतावरी जो एक औषधीय गुणों से भरपूर पौधा है, इसे दूसरे देशों से आयात किया जाता रहा है। यह यहां 1200 से 1500 प्रति किलो की कीमत पर बिकने लगा है। इसकी उपज फिलहाल गंगा के मैदानी और बिहार के पठारी इलाकों में अधिक है लेकिन अब इसकी उपज उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में भी ली जाने लगी है।
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