रांची में एम्स निर्माण का स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने किया स्वागत, कहा- राजनीतिक द्वेष भूल साथ मिलकर करेंगे काम

 

रांची। झारखंड में देवघर के बाद रांची में एम्स बनाने की मांग स्थानीय सांसद संजय सेठ ने की है। सांसद की पहल पर पीएमओ ने भी संज्ञान लिया है। पीएमओ ने इसके लिए राज्य सरकार से जमीन और राय मांगी है। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने रांची में एम्स के निर्माण पर राय देते हुए कहा कि केंद्र सरकार के इस फैसले का वे स्वागत करते हैं। बन्ना गुप्ता ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में केंद्र का जो भी निर्देश होगा उसका वे पालन करेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्र के फैसले पर पूरी ईमानदारी से काम करेगी। बन्ना गुप्ता ने कहा कि स्वास्थ्य राजनीति का विषय नहीं है। यह धर्म, मानवता और राष्ट्रीयता का विषय है, इसीलिए केंद्र और राज्य दोनों अपने अपने राजनीतिक द्वेष को भूलकर एम्स निर्माण में मिलकर काम करना चाहिए। देवघर एम्स की परेशानी को किया ठीक : स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि एम्स देवघर के निदेशक ने उनसे मुलाकात की थी। उन्होंने पानी, बिजली और सड़क की समस्या से उन्हें अवगत कराया था, जिसके बाद उन्होंने त्वरित गति से सभी समस्याओं को हल करने के लिए काम किया। एम्स के निर्माण के लिए भूमि चिन्हित करने को लेकर पीएमओ ने पत्र लिखा है। इस बाबत उद्योग निदेशक जितेंद्र सिंह ने स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह को पत्र लिख कर विभाग का मंतव्य और भूमि चिन्हित कर जानकरी मांगी गई है। संजय सेठ ने पीएम मोदी से की थी मांग : रांची के भाजपा सांसद संजय सेठ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से झारखंड में एक और एम्स की जरूरत बताते हुए रांची में एम्स बनाने का आग्रह किया था। सांसद संजय सेठ का कहना है कि रांची में एम्स खुलने से इसका लाभ झारखंड की जनता के अलावा पड़ोसी राज्यों के निकटवर्ती जिले के लोगों को भी मिलेगा और यह राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। रघुवर राज में देवघर में एम्स की मिली थी अनुमति : राज्य में भाजपा शासन में रघुवर दास के मुख्यमंत्रित्व काल में देवघर में एम्स खोलने की अनुमति मिली थी। तब तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी और कई कैबिनेट मंत्री की इच्छा रांची में एम्स खोलने की थी। लेकिन मुख्यमंत्री रघुवर दास की इच्छा संथाल क्षेत्र के देवघर में एम्स बनाने की थी। तब तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री के साथ-साथ राज्य के कई प्रबुद्ध डॉक्टरों की राय थी कि एम्स जैसा बड़ा अस्पताल राजधानी में होना चाहिए ताकि देश के बड़े-बड़े डॉक्टर और फैकल्टी संस्थान में सेवा देने के लिए उपलब्ध हो सकें।

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