रांची/लखनऊ। ओरमांझी के भाजपा नेता जीतराम मुंडा को गोली मारने वाला मुख्य शूटर अली शेर ढेर हो गया। उसे यूपी की एसटीएफ ने लखनऊ में मार गिराया। उसके साथ उसका एक साथी कामरान भी मारा गया। जीतराम की हत्या के बाद रांची पुलिस को लगातार उसकी तलाश थी। वह पुलिस को चकमा देकर भागा-भागा फिर रहा था। यूपी के आजमगढ़, मऊ समेत चार जिलों में उस पर 24 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। यूपी पुलिस भी उसे ढूंढ़ रही थी। बुधवार को जैसे ही अली के लखनऊ के मडियांव में होने की सूचना मिली। एसटीएफ ने तुरंत इलाके को घेर लिया। दोनों ओर से हुई फायरिंग में अली शेर और कामरान ढेर हो गये। आरोप है कि 5 लाख की सुपारी लेकर अली शेर ने अपने सहयोगी बबलू यादव के साथ मिलकर ओरमांझी के पालू में जीतराम को गोली मार फरार हो गए थे। जीतराम की हत्या में शामिल डब्लू यादव और संदेह पर मनोज मुंडा के भाई कार्तिक मुंडा को रांची पुलिस ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। वहीं मुख्य संदेही साजिशकर्ता मनोज मुंडा को भी रांची पुलिस ने सिविल कोर्ट से धर दबोचा। पुलिसिया दबाव में वह सरेंडर करने कोर्ट पहुंचा था, मगर सरेंडर से पहले ही धरा गया। एसटीएफ के एएसपी विशाल विक्रम सिंह के मुताबिक अलीशेर उर्फ डॉक्टर और बन्नू उर्फ कामरान दोनों मऊ के निर्दलीय विधायक मुख्तार अंसारी के करीबी हैं। दोनों पहले मुन्ना बजरंगी के लिए काम करते थे। मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में हत्या के बाद दोनों सीधे तौर पर मुख्तार अंसारी से जुड़ गये। इसके पहले मुख्तार के इशारे पर मुन्ना की अनुमति पर काम करते थे। एएसपी के मुताबिक अलीशेर उर्फ डॉक्टर आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर, वाराणसी जिलों में आतंक का पर्याय बन गया था। एक लाख का इनामी अलीशेर उर्फ डॉक्टर कुख्यात शूटर था। उसका निशाना अचूक था। वह उत्तर प्रदेश ही नहीं आसपास के अन्य प्रांतों में सुपारी लेकर हत्या करता था। दोनों के पास से 30 एमएम की एक कार्बाइन, 9 एमएम की एक पिस्तौल, 32 बोर की एक पिस्तौल, एक तमंचा, एक बाइक और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किया है।
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