टीम एबीएन, रांची। राजधानी रांची कभी तालाबों का शहर कहा जाता था। लेकिन जैसे जैसे राजधानी की आबादी बढ़ी और विकास हुआ, वैसे वैसे जलाशय सिकुड़ता चला गया. अब स्थिति यह है कि जो तालाब और जलाशय बचा है, वह काफी प्रदूषित हो गया है। इसकी वजह है कि रांची की सीवरेज और ड्रेनेज सिस्टम ध्वस्त है और नाले के गंदे पानी इन्हीं जलाशयों में गिरता है।
स्वर्णरेखा नदी, हरमू नदी के साथ साथ हटिया डैम, कांके डैम, विवेकानंद सरोवर, अरगोड़ा तालाब और बटन तालाब प्रमुख जलाशय हैं। इन सभी जलाशयों में नाले के गंदे पानी गिरता है, जिससे काफी प्रदूषित हो गये हैं। राजधानी के सबसे बड़ा तालाबों में सुमार विवेकानंद सरोवर में कांके रोड, राजभवन, अपर बाजार से लेकर रातू रोड आदि इलाकों के गंदा पानी गिरता है। ताबाल में गंदा पानी नहीं गिरे। इसको लेकर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का कोई व्यवस्था नहीं की गयी है।
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