टीम एबीएन, रांची। जीएसटी निबधंन या रजिस्ट्रेशन कैसे होता है? जिन व्यवसायियों का सालाना टर्नओवर 40 लाख रुपये से अधिक होता है, उनके लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराकर जीएसटीआइएन लेना जरूरी होता है. कुछ राज्यों में टर्नओवर की यह सीमा 20 लाख रुपये से अधिक है. इसलिए, अगर आप इस टर्नओवर के दायरे में आते हैं, तो आपको जीएसटी का रजिस्ट्रेशन कराना होगा। मान लें इस वर्ष तक आपकी कुल सालाना विक्रय, जिसे हम टर्नओवर कहते है, 19 लाख है तो आपको न जीएसटी ग्राहक से लेना है और न सरकार को देना हैं। आपको जीएसटी रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं है। छोटे व्यापारियों के लिए यह बहुत बड़ी राहत है। पर अगर इस वर्ष आपका सालाना टर्निवर 40 लाख या ज्यादा हो जाता है तो आपको जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराना आवश्यक है।
इसमें एक व्यवस्था और है कि अगर आप कि सालाना ट्यूरीवर 40 लाख से ज्यादा है पर 1.50 करोड़ से कम है तो आप कंप्सिशन स्कीम के तहत जीएसटी रजिस्ट्रेशन करवा सकते है जिसमे आपको महज 1 % जीएसटी देना होता है और आप को मासिक के स्थान पर त्रैमासिक अर्थात तीन माह में एक बार ही जीएसटी रिटर्न भरना होता है। जीएसटी में रजिस्ट्रेशन की कोई फीस नहीं है। आप खुद ही जीएसटी पोर्टल पर जाकर आॅनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं या किसी कर सलाहकार की मदद ले सकते हैं। कहने का तात्पर्य है कि जिन लोगों का सालाना टर्नओवर 40 लाख रुपये से अधिक होता है, उनके लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराकर जीएसटीआइएन लेना जरूरी होता है (कुछ राज्यों में टर्नओवर की यह सीमा 20 लाख रुपये है)।
हाल ही में जीएसटी काउंसिल ने किसी राज्य के अंदर ई-कॉमर्स पोर्टल के जरिये सप्लाई के नियम को आसान बना दिया है। आॅनलाइन सप्लायर का सालाना टर्नओवर 40 लाख रुपये से कम है या 20 लाख रुपये से कम का जीएसटी है, तो उसे जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं होगी. यह नया नियम 1 जनवरी, 2023 से लागू होगा। जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए फोटोग्राफ, पैन कार्ड, आधार कार्ड, बैंक डीटेल्स, एकाउंट स्टेमेंट और कैंसिल चेक,आॅथराइजेशन फॉर्म या बोर्ड रेजोल्यूशन जैसे दस्तावेजों की आवश्कता पड़ती है। जीएसटी रजिस्ट्रेशन के 15 अंकों या अक्षरों का जीएसटीआइएन मिलता है जिसमें प्रथम दो अंक आप के राज्य को बताते है और अगले 10 अंक आपका पैन नंबर होता है। शेष अंक या अक्षर कुछ भी हो सकता है। व्यवसाय को अपना यह जीएसटी नंबर अपने कार्यालय में पब्लिक की जानकारी के लिए डिस्पले करना होता है।
जीएसटी रजिस्ट्रेशन का सबसे बड़ा लाभ है कि इसके बिना आप जीएसटी ले नही सकते। जिसका तात्पर्य है कि एक व्यवसाई बिना रजिस्ट्रेशन के जीएसटी नंबर नहीं ले सकता और बिना इसके जब वो समान की खरीद करेगा तो उसको तो जीएसटी देना होगा पर वो अपने ग्राहक से जीएसटी ले नही पाएगा। इस से उसको इनपुट क्रेडिट नहीं मिलेगा और जीएसटी उसको अपनी जेब से भरना पड़ जायेगा जो उसके लिए आर्थिक क्षति होगी। फिर जीएसटी रजिस्ट्रेशन से एक सम्मान की अनुभूति भी होती है कि आप भी करदाता हैं और देश के विकास में आपका सहयोग है। रजिस्ट्रेशन करवा लेने से अंदर की गलत भावना भी समाप्त हो जाती है इसके बाद सरकारी कर अधिकारी अनावश्यक जांच और तंग नहीं करेंगे। (लेखक सीएमए, कोल इंडिया के सेनि अधिकारी,जीएसटी के कई पुस्तकों के लेखक और कर सलाहकार हैं।)
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