एबीएन सेंट्रल डेस्क। बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को नेशनल हाई स्पीड रेल कॉपोर्रेशन को मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए मुंबई, पालघर और ठाणे में मैंग्रोव के लगभग 20 हजार पेड़ काटने की अनुमति दे दी। चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस अभय आहूजा की खंडपीठ ने मैंग्रोव के पेड़ों को काटने की मांग वाली याचिका स्वीकार कर ली।
हाईकोर्ट के साल 2018 के एक आदेश के तहत राज्यभर में मैंग्रोव (दलदलीय भूमि में उगे पेड़ व झाड़ियां) के पेड़ों की कटाई पर पूर्ण पाबंदी है और जब भी कोई प्राधिकरण किसी सार्वजनिक परियोजना के लिए मैंग्रोव के पेड़ों को काटना जरूरी समझता है तो उसे हर बार हाईकोर्ट से अनुमति लेनी होती है। उक्त आदेश के तहत जिस क्षेत्र में मैंग्रोव के पेड़ हैं, उसके आसपास 50 मीटर का बफर जोन बनाया जाना चाहिए, जिसमें किसी भी निर्माण गतिविधि या मलबे को गिराने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
2020 में दायर याचिका में अदालत को आश्वस्त किया था कि पहले मैंग्रोव के जितने पेड़ों को काटे जाने की योजना थी, वह उनका पांच गुना पेड़ लगाएगा। हालांकि, बॉम्बे एन्वायर्नमेंटल एक्शन ग्रुप नाम के एक गैर-सरकारी संगठन ने यह कहते हुए याचिका का विरोध किया था कि प्रतिपूरक उपाय के रूप में लगाए जाने वाले पौधों की जीवित रहने की दर के बारे में कोई अध्ययन नहीं किया गया है और पेड़ों की कटाई के लिए पर्यावरणीय प्रभाव आकलन रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई है। एनजीओ की आपत्तियों को खारिज करते हुए दावा किया था कि उसने सार्वजनिक महत्व की परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई को लेकर आवश्यक अनुमोदन हासिल कर लिया था और इसके कारण होने वाले नुकसान की भरपाई पौधे लगाकर की जाएगी। अहमदाबाद और मुंबई के बीच प्रस्तावित 508 किलोमीटर लंबे हाई स्पीड रेल गलियारे से दोनों शहरों के बीच का यात्रा का समय साढ़े छह घंटे से घटकर ढाई घंटे रह जाने की उम्मीद है।
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